"बेगूसराय": अवतरणों में अंतर

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==संस्कृति==
बेगूशोराय की संस्कृति मिथिलांचल की सांस्कृतिक विरासत को परिभाषित करती है। बेगूशा बेगूशोराय के लोगों द्वारा बनाई जाती हे जो एक प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग है। बेगूशोराय सिमरिया मेले के लिए भी प्रसिद्ध है, जो भारतीय पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक के महीने के दौरान भक्ति महत्व का मेला है। नवंबर).<ref>{{साइट वेब|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/allahabad/Revive-Kumbh-Mela-in-eight-ऐतिहासिक-cities/articleshow/7362232.cms|title=' आठ ऐतिहासिक शहरों में फिर से शुरू होगा कुंभ मेला' | इलाहाबाद समाचार - टाइम्स ऑफ इंडिया|वेबसाइट=द टाइम्स ऑफ इंडिया|एक्सेसडेट=8 फरवरी 2020}}</ref>
बेगूशोराई में पुरुष और महिलाएं बहुत धार्मिक हैं और त्योहारों के अनुसार भी कपड़े पहनते हैं। बेगूशोराय की वेशभूषा मिथिला की समृद्ध पारंपरिक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है। पंजाबी रूपी कुर्ता और धोती के साथ लाल बंगाली गमछा उनके सिर को ढकता हैं, पुरुषों के बीच आम कपड़े हैं। वे अपनी नाक में सोने की बाली और अपनी कलाई में बल्ला पहनते हैं। महिलाओं को लाल-पारा (लाल बॉर्डर वाली सफेद या पीली साड़ी) पहनना पसंद है। और बेगूशोराय की महिलाएं भी हाथ में लहठी के साथ शाखा-पोला पहनती हैं। मिथिला संस्कृति में, इसका अर्थ है नई शुरुआत, जुनून और समृद्धि। लाल हिंदू देवी दुर्गा का भी प्रतिनिधित्व करता है, जो नई शुरुआत और स्त्री शक्ति का प्रतीक है।
छ‌इठ के दौरान बेगूशोराय की महिलाएं बिना सिलाई के शुद्ध सूती धोती पहनती हैं जो मिथिलांचल की पारंपरिक संस्कृति को दर्शाता है।
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