"प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय": अवतरणों में अंतर

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जानकारी और संदर्भ
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(जानकारी और संदर्भ)
 
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{{Infobox Organization
|name= प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय
[[चित्र:Brahma Kumaris.jpg|पाठ=|अंगूठाकार|300x300पिक्सेल|ब्रह्मकुमारियाँ]]
 
[[चित्र:Dada_Lekhraj_in_den_20er_Jahren.jpg|दाएँ|अंगूठाकार|409x409पिक्सेल|१९२० के दशक में दादा लेखराज]]
'''प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्‍वरीय विश्‍व विद्यालय''' मानव कल्‍याण की दिशा में उपयोग करने वाली एक संस्‍था है।जीवन की दौड़-धूप से थक चुके मनुष्‍य आज शांति की तलाश में इस संस्‍था की ओर प्रवृत्‍त हो रहे हैं।
[[चित्र:Brahma_Kumaris.jpg|पाठ=|अंगूठाकार|300x300पिक्सेल|ब्रह्मकुमारियाँ]]
'''प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्‍वरीय विश्‍व विद्यालय''' एक संस्‍था है जो मेडिटेशनटेकरवाती‍था है। जिसकी विश्‍व के '''१३७''' देशों में ८,५०० से अधिक शाखाएँ हैं।
 
 
इस संस्था का मत है कि 5000 वर्ष का एक विश्व नाटक चक्र होता है जिसमें चार युग होते हैं श्रीकृष्ण सतयुग के आरम्भ में आते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.brahma-kumaris.com/world-drama-cycle-hindi|title=विश्व नाटक चक्र {{!}} राजयोग कोर्स|website=Brahma Kumaris|language=en|access-date=2021-11-27}}</ref>
यह कोई नया धर्म नहीं बल्कि विश्‍व में व्‍याप्‍त धर्मों के सार को आत्‍मसात कर उन्‍हें मानव कल्‍याण की दिशा में उपयोग करने वाली एक संस्‍था है। जिसकी विश्‍व के '''१३७''' देशों में ८,५०० से अधिक शाखाएँ हैं। इन शाखाओं में १० लाख विद्यार्थी प्रतिदिन नैतिक और आध्‍यात्मिक शिक्षा ग्रहण करते हैं।
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== स्थापना ==
2,410

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