"महाप्राण और अल्पप्राण व्यंजन": अवतरणों में अंतर

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महाप्राण व्यंजन 14 नही, 15 होते है।
(अल्पप्राण मे इ के बजाए ई होगा)
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(महाप्राण व्यंजन 14 नही, 15 होते है।)
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वर्ग का 1,3,5 अक्षर - अन्तस्थ - द्विगुण या उच्छिप्त
महाप्राण व्यंजन
ऐसे व्यंजन जिनको बोलने में अधिक प्रत्यन करना पड़ता है और बोलते समय मुख से अधिक वायु निकलती है। उन्हें महाप्राण व्यंजन (Mahapran) कहते हैं। इनकी संख्या 1415
होती है।
ख घ
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