"सिद्ध साहित्य": अवतरणों में अंतर

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* इस साहित्य में [[तन्त्र|तंत्र]] साधना पर अधिक बल दिया गया।
* साधना पद्धति में [[शिव]]-[[शक्ति]] के युगल रूप की उपासना की जाती है।
* साधना पद्धति में [[आदिबुद्ध]]-[[प्रज्ञापारमिता ]] के युगल रूप की उपासना की जाती है। ये कहना गलत है कि शिव और शक्ति की पुजा करते हैं सिद्ध जो कि गलत है|सिद्ध परंपरा बौद्ध धर्म की सहजयान सम्प्रदाय में कालचक्रतंत्र में आदिबुद्ध और प्रज्ञापारमिता कि पुजा कि जाती है|यहा आदिबुद्ध को शुन्यता कहा है और प्रज्ञापारमिता को शुद्ध चेतना जिसके संगम से ही परमतत्व को पाया जाता है |यहा हम आदिबुद्ध और प्रज्ञापारमिता बौद्ध धर्म की परमेश्वर कि अवधारणा रुप में समज सकते हैं |वहीं शैव सम्प्रदाय [[शिव]] और [[शक्ति]] रूप में इन्हें पुजते है |
* इसमें जाति प्रथा एवं वर्णभेद व्यवस्था का विरोध किया गया।
* इस साहित्य में ब्राह्मण धर्म का खंडन किया गया है।

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