"मौर्य राजवंश" के अवतरणों में अंतर

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== अजापाल चन्द्रगुप्त मौर्य का कुल ==
{{main|चन्द्रगुप्त मौर्य}}
चन्द्रगुप्त मौर्य नन्द वंश के सस्थाषक चक्रवर्ती सम्राट महापद्मनंद (नाई ) के (10)वे पुत्र थे जिनका वास्तविक नाम चंद्रनन्द था जिनकी मा (मुरा) एकमौर्य प्राचीन नाईक्षत्रियक्षत्रिय कबीले के हिस्से रहे है। ब्राह्मण साहित्य, विशाखदत्त कृत व यूनानी स्रोतों के अनुसार मौर्य नाईक्षत्रियक्षत्रिय चंद्रवंशी राजवंश है।
जैन और बौद्ध ग्रंथों से ये प्राप्त होता हैं कि महापद्मनंद की दो रानियों थी (1) रानी अवंतिका और (2) रानीमुरा और दोनों महारानियां ही बेहद सुंदर और खूबसूरत थी महापद्मनंद की रानियों के बारे में अधिक जानकारी नही मिलती हैं
 
;मौर्य के नाईक्षत्रियक्षत्रिय होने के प्रमाण-
पुराणों में महापद्मनंद के दस पुत्र उत्तराधिकारी बताए गए हैं। वहाँ उनके नाम मिलते हैं
 
(1) गंगन पाल, (2) पंडुक, (3) पंडुगति, (4) भूतपाल, (5) राष्ट्रपाल, (6) गोविषाणक, (7) दशसिद्धक, (8) कैवर्त और (9) धननन्द, (10) चन्द नन्द (चन्द्रगुप्त मौर्य)
 
चन्द्रगुप्त मौर्य नन्द वंश के सस्थाषक चक्रवर्ती सम्राट महापद्मनंद (नाई ) के (10)वे पुत्र थे जिनका वास्तविक नाम चंद्रनन्द था जिनकी मा (मुरा) एकमौर्य प्राचीन नाईक्षत्रिय कबीले के हिस्से रहे है। ब्राह्मण साहित्य, विशाखदत्त कृत व यूनानी स्रोतों के अनुसार मौर्य नाईक्षत्रिय चंद्रवंशी राजवंश है।
;मौर्य के नाईक्षत्रिय होने के प्रमाण-
 
1.बौद्ध धर्म ग्रंथ
6.सबसे सीधा और सरल प्रमाण यह है कि स्वंय चाणक्य कट्टरवादी ब्राह्मण थे वो कभी भी किसी शूद्र को न अपना शिष्य बनाते और न ही चन्द्रगुप्त को राजा बनने में मदद करते।
 
7.हिन्दू ग्रन्थ विष्णु पुराण और स्कन्द पुराण के अनुसार शाक्य चन्द्रवंशीसूर्यवंश से सम्बंधित नाईक्षत्रियक्षत्रिय है और चन्द्रगुप्त के पूर्वज इसी वंश से सम्बंधित थे और इसीलिए वो भी नाईक्षत्रियक्षत्रिय है।
 
8.चन्द्रगुप्त को शूद्र केवल एक ही प्राचीन साहित्य मुद्राराक्षस में लिखा है जो की एक नाटक है और ये गुप्तकाल में विशाखदत्त द्वारा लिखी गयी है।

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