"भगवान" के अवतरणों में अंतर

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(विष्णु पुराण 6/5/74)
'''भगवान''' गुण वाचक शब्द सर्वहै शक्तिमानजिसका केअर्थ लियेगुणवान होता है। यह "भग" धातु से बना है ,भग के ६ अर्थ है:-
१-समस्त ऐश्वर्य
२-धर्मवीर्य
३-स्मृति
३-यश
४-श्रीयश
५-ज्ञान और
६-सौम्यता
६-वैराग्य
जिसके पास ये ६ गुण है वह भग संज्ञा प्राप्त कर भगवान बनता है।
"ऐश्वर्यस्य समस्तस्य (समग्रस्य) धर्मस्य यशसः श्रीयः ज्ञान वैराग्ययोश्चैव षण्णां भग इतिड़्ना।।"
 
संस्कृत भाषा में भगवान "भंज" धातु से बना है जिसका अर्थ हैं:- सेवायाम् रत । जो सभी की सेवा में लगा रहे कल्याण और दया करके सभी मनुष्य जीव ,भूमि गगन वायु अग्नि नीर को दूषित ना होने दे सदैव स्वच्छ रखे वो भगवान का भक्त होता है
 
श्रीमद्भगवद्गीता शांकर भाष्य पृ. 156 श्रीमद्भगवद्गीता शांकर भाष्य तृतीय अध्याय से
 
 
🌠‘उत्पत्तिं प्रलयं चैव भूतानामागतिं गतिम्। वेत्ति विद्यामविद्यां च से वाच्यो भगवानिति।।’ [1]
 
‘उत्पत्ति और प्रलय को, भूतों के आने और जाने को एवं विद्या और अविद्या को जो जानता है, उसका नाम भगवान् है’ अतः उत्पत्ति आदि सब विषयों को जो भलीभाँति जानते हैं।
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साभार krishnakosh.org
 
 
संस्कृत भाषा में भगवान "भंज" धातु से बना है जिसका अर्थ हैं:- सेवायाम् रत । जो सभी की सेवा में लगा रहे कल्याण और दया करके सभी मनुष्य जीव ,भूमि गगन वायु अग्नि नीर को दूषित ना होने दे सदैव स्वच्छ रखे वो भगवान का भक्त होता है
 
== संज्ञा ==

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