"गोधरा काण्ड" के अवतरणों में अंतर

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हालाँकि ग्यारह साल बाद भारत की एक न्यायालय ने मुसलमान बिरादरी के [[३१|31]] लोगों को इस घटना के लिए दोषी ठहराया।{{sfn|Jeffery|2011|p=1988}}<ref name="Metcalf 2012">{{cite book|last=Metcalf|first=Barbara D.|title=A Concise History of Modern India|year=2012|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1107026490|page=280}}</ref>
 
== गोधरा कांड (काण्ड): घटनाक्रम ==
 
'''27 फ़रवरी 2002''' : गोधरा रेलवे स्टेशन के पास साबरमती ट्रेन के एस-6 कोच में मुस्लिमों द्वारा आग लगाए जाने के बाद 59 कारसेवकों हिंदुओं (हिन्दुओ) की मौत हो गई। इस मामले में 1500 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
 
'''28 फ़रवरी 2002''' : गुजरात के कई इलाकों में दंगा भड़का जिसमें 1200 से अधिक लोग मारे गए।
'''03 मार्च 2002''' : गोधरा ट्रेन जलाने के मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक अध्यादेश (पोटा) लगाया गया।
 
'''06 मार्च 2002''' : गुजरात सरकार ने कमीशन ऑफ इन्क्वायरी एक्ट के तहत गोधरा कांड (काण्ड) और उसके बाद हुई घटनाओं की जाँच के लिए एक आयोग की नियुक्ति की।
 
'''09 मार्च 2002''' : पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भादसं की धारा 120-बी (आपराधिक षड्‍यंत्र) लगाया।
 
'''25 मार्च 2002''' : केंद्र (केन्द्र) सरकार के दबाव की वजह से सभी आरोपियों पर से पोटा हटाया गया।
 
'''18 फ़रवरी 2003''' : गुजरात में भाजपा सरकार के दोबारा चुने जाने पर आरोपियों के खिलाफ फिर से आतंकवाद निरोधक कानून लगा दिया गया।
'''04 सितंबर 2004''' : राजद नेता लालू प्रसाद यादव के रेलमंत्री रहने के दौरान केद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के आधार पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश यूसी बनर्जी की अध्यक्षता वाली एक समिति का गठन किया गया। इस समिति को घटना के कुछ पहलुओं की जाँच का काम सौंपा गया।
 
'''21 सितंबर''' : नवगठित संप्रग सरकार ने पोटा कानून को खत्म कर दिया और अरोपियों के खिलाफविरुद्ध पोटा आरोपों की समीक्षा का फैसला किया।
 
'''17 जनवरी 2005''' : यूसी बनर्जी समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया कि एस-6 में लगी आग एक ‘दुर्घटना’ थी और इस बात की आशंका को खारिज किया कि आग बाहरी तत्वों द्वारा लगाई गई थी।
'''12 फ़रवरी 2009''' : उच्च न्यायालय ने पोटा समीक्षा समिति के इस फैसले की पुष्टि की कि कानून को इस मामले में नहीं लागू किया जा सकता है।
 
'''20 फरवरी''' : गोधरा कांड (काण्ड) के पीड़ितों के रिश्तेदार ने आरोपियों पर से पोटा कानून हटाए जाने के उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। इस मामले पर सुनवाई अभी भी लंबित है।
 
'''01 मई''' : उच्चतम न्यायालय ने गोधरा मामले की सुनवाई पर से प्रतिबंध हटाया और सीबीआई के पूर्व निदेशक आरके राघवन की अध्यक्षता वाले विशेष जाँच दल ने गोधरा कांड और दंगे से जुड़े आठ अन्य मामलों की जाँच में तेजी आई।
 
'''01 जून''' : गोधरा ट्रेन कांड (काण्ड) की सुनवाई अहमदाबाद के साबरमती केंद्रीय (केन्द्रीय) जेल के अंदर (अन्दर) शुरू हुई।
 
'''06 मई 2010''' : उच्चतम न्यायालय सुनवाई अदालत को गोधरा ट्रेन कांड समेत गुजरात के दंगों से जुड़े नौ संवेदनशील मामलों में फैसला सुनाने से रोका।
'''28 सितंबर''' : सुनवाई पूरी हुई लेकिन शीर्ष अदालत द्वारा रोक लगाए जाने के कारण फैसला नहीं सुनाया गया।
 
'''18 जनवरी 2011''' : उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाने पर से प्रतिबंध (प्रतिबन्ध) हटाया।
 
'''22 फरवरी''' : विशेष अदालत ने गोधरा कांड (काण्ड) में 31 लोगों को दोषी पाया, जबकि 63 अन्य को बरी किया।
 
'''1 मार्च 2011: विशेष अदालतन्यायालय ने गोधरा कांड (काण्ड) में 11 को फांसी, 20 को उम्रकैद की सजा सुनाई।
 
==सन्दर्भ==
1,778

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