"तिथियाँ": अवतरणों में अंतर

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== तिथियों के नाम और उनका महत्त्व<ref>{{Cite web|url=https://todaytithi.com/aaj-ki-tithi-today-tithi/|title=तिथियों के नाम और उनका महत्त्व|last=|authorlink=|date=|website=todaytithi.com|publisher=todaytithi.com owns by deepanshu sharma|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> ==
हमारे पर्व-त्योहार हिन्दी तिथियों के अनुसार ही होते हैं, इसके पीछे एक विशेष कारण है। पर्व-त्योहारों में किसी विशेष देवता की पूजा की जाती है। अतः स्वाभाविक है कि वे जिस तिथि के अधिपति हों, उसी तिथि में उनकी पूजा हो। यही कारण है कि उस विशेष तिथि को ही उस विशिष्ट देवता की पूजा की जाए। तिथियों के स्वामी संबंधी वर्णन निम्न है :
 
हमारे पर्व-त्योहार हिन्दी तिथियों के अनुसार ही होते हैं, इसके पीछे एक विशेष कारण है। पर्व-त्योहारों में किसी विशेष देवता की पूजा की जाती है। अतः स्वाभाविक है कि वे जिस तिथि के अधिपति हों, उसी तिथि में उनकी पूजा हो। इसके लिए [https://todaytithi.com/aaj-ki-tithi-today-tithi/ तिथि की गणना] की जाती है। यही कारण है कि उस विशेष तिथि को ही उस विशिष्ट देवता की पूजा की जाए। तिथियों के स्वामी संबंधी वर्णन निम्न है :
 
# प्रतिपदा- अग्नयादि देवों का उत्थान पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को होता है। अग्नि से संबंधित कुछ और विशेष पर्व प्रतिपदा को ही होते हैं।
# षष्ठी- स्वामी कार्तिक की पूजा षष्ठी को होती है।
# सप्तमी- देश-विदेश में मनाया जाने वाला सर्वप्रिय त्योहार प्रतिहार षष्ठी व्रत (डालाछठ) यद्यपि षष्ठी और स्वामी दोनों दिन मनाया जाता है, किंतु इसकी प्रधान पूजा (और उदयकालीन सूर्यार्घदान) सप्तमी में ही किया जाता है। छठ पर्व के निर्णय में सप्तमी प्रधान होती है और षष्ठी गौण। यहाँ ज्ञातव्य है कि सप्तमी के देवता सूर्य हैं।
#अष्टमी- रूद्र देव की पूजा की जाती है और इस दिन विजय दिवस होता है।
#नवमी- माँ दुर्गा का दिन होता है। माँ की आराधना करने से फल की प्राप्ति होती है।
#दशमी - धर्मराज की तिथि होती है और इस द्दिन पुण्य करने का योग होता है।
#एकादशी- इसके देवता महादेव है। व्रत करने का एक अपना ही महत्त्व है।
#द्वादशी- विष्णु भगवन की तिथि है और अनुष्टान करना चाहिए।
#त्रियोदशी- यह तिथि कामदेव की है और इस दिन प्रेम भाव का दिवस होता है।
#चतुर्दशी- माँ काली का दिन होता है और शत्रुओ पर विजय का दिवस होता है।
 
वस्तुतः सायंकालीन अर्घ्य में हम सूर्य के तेजपुंज (सविता) की आराधना करते हैं, जिन्हें 'छठमाई' के नाम से संबोधित करके उन्हें प्रातःकालीन अर्घ्य ग्रहण करने के लिए निमंत्रित किया जाता है, जिसे ग्रामीण अंचलों में 'न्योतन' कहा जाता है, पुनः प्रातःकालीन सूर्य को 'दीनानाथ' से संबोधित किया जाता है।
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