"भक्ति काल" के अवतरणों में अंतर

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== रामाश्रयी शाखा ==
[[File:Tulsidas composing his famous Avadhi Ramcharitmanas.jpg|thumb|तुलसीदास जी]]
कृष्णभक्ति शाखा के अंतर्गत लीला-पुरुषोत्तम का गान रहा तो रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि तुलसीदास ने मर्यादा-पुरुषोत्तम का ध्यान करना चाहा। इसलिए आपने रामचंद्र को आराध्य माना और '[[श्रीरामचरितमानस|रामचरित मानस]]' द्वारा राम-कथा को घर-घर में पहुंचा दिया। [[तुलसीदास]] हिंदी साहित्य के श्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। समन्वयवादी तुलसीदास में लोकनायक के सब गुण मौजूद थे। आपकी पावन और मधुर वाणी ने जनता के तमाम स्तरों को राममय कर दिया। उस समय प्रचलित तमाम भाषाओं और छंदों में आपने रामकथा लिख दी। जन-समाज के उत्थान में आपने सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य किया है। इस शाखा में अन्य कोई कवि तुलसीदास के सम। न उल्लेखनीय नहीं है तथापि अग्रदास, नाभादास तथा प्राण चन्द चौहान भी इस श्रेणी में आते हैं। इसी कारण रामकथा हिंदी साहित्य में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
 
रामभक्ति शाखा की प्रवृत्तियाँ
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