"भगवान": अवतरणों में अंतर

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== भगवान कहाँ हैं ? ==
वास्तव में भगवान हैं! भगवान तो आपके अन्दर ही हैं। परम पूज्य दादाश्री कहते हैं '''“गोड इज इन एवरी लिविंग क्रिएचर, वेधर विज़ीबल और इनविज़ीबल।”''' भगवान सभी जीवों में रहते हैं, फिर भले ही वे आँख से दिखनेवाले हों या न दिखनेवाले हों। यह देह तो पैकिंग (खोखा) है। भीतर बैठे हैं, वे भगवान हैं। यह आपका भी देह रूपी पैकिंग है और भीतर भगवान विराजे हैं। यह गधा है, तो यह भी गधे का पैकिंग है और भीतर भगवान विराजे हैं। यह पैकिंग तो कैसा भी हो सकता है। कोई सागवान का होता है, कोई आम की लकड़ी का होता है। ये व्यापारी पैकिंग देखते हैं या भीतर का माल देखते हैं?<ref>{{cite web|url=https://hindi.dadabhagwan.org/path-to-happiness/spiritual-science/knowing-god/|title=Bhagwan Ki Pehchaan|last=|first=|date=|website=www.dadabhagwan.org|language=en|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=2021-01-02}}</ref>
 
== नोट ==
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