"मान्य औषधकोश" के अवतरणों में अंतर

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भारतीय शासन द्वारा स्थापित नैशनल फार्मूलरी कमिटी ने 'नैशनल फार्मूलरी ऑव इंडिया' नामक एक ग्रंथ अंग्रेजी में तैयार किया, जिसमें लगभग सब ओषधि द्रव्यों का वर्णन और उनसे बनने वाले नुस्खे दिए हैं। यह 1960 ई0 में स्वास्थ्य मंत्रालय, केंद्रीय सरकार, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित हो गया। ब्रिटिश फारमाकोपिया के आधार पर हिंदी में 'पाश्चात्य द्रव्य-गुण-विज्ञान' पर एक पुस्तक डॉ॰ रामसुशील सिंह द्वार लिखी गई और [[मोतीलाल बनारसीदास]] [[वाराणसी]] द्वारा प्रकाशित हुई है।
 
==भारतीय भेषज संहिता==
भारतीय भेषज संहिता (आई.पी.), जो कि दवाओं के मानकों की आधिकारिक पुस्तक है, के समय पर प्रकाशन से संबंधित मामलों से निपटने के लिए [[भारत सरकार]] ने [[भारतीय भेषज संहिता आयोग]] ( आई.पी.सी.) के रूप में एक अलग समर्पित, स्वायत्त संस्था का गठन किया। आई.पी. में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट , 1940 के द्वितीय अनुसूची के मामले शामिल हैं, ताकि भारत में वितरित या विक्रय के लिए आयातित दवाओं की पहचान, शुद्धता और ताकत के मानकों को निर्धारित किया जा सके। आयोग का अधिदेश (mandate) भेषजसंहिता (आई.पी.) और भारतीय राष्ट्रीय फॉर्मूलेरी (एन.एफ.आई.) के संशोधन और प्रकाशन जैसे कार्यों को सदैव नियमित रूप से करने के अलावा, हितधारकों को भारतीय भेषजसंहिता संदर्भ पदार्थ (आई.पी.आर.एस.) और फार्माकोपियियल मुद्दों पर प्रशिक्षण प्रदान करना है।
 
भारतीय भेषज-संहिता आयोग 1 जनवरी, 2009 से एक स्वायत्त निकाय के रूप में पूरी तरह से परिचालित हो गया है। यह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत विशिष्ट बजटीय आवंटन के साथ केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्तपोषित है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव इस आयोग के अध्यक्ष हैं एवं वैज्ञानिक-मंडल के अध्यक्ष, इसके सह-अध्यक्ष हैं। सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक इस आयोग के मुख्य वैज्ञानिक और कार्यकारी अधिकारी हैं।
 
== इन्हें भी देखें ==

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