"देविन्दर वाल्मीकि" के अवतरणों में अंतर

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चूहड़ा, भंगी, वाल्मीकि, महेत्र सभी साले एक ही टट्टी के कीड़े हैं। फालतू में विकीपीडिया पर टट्टी के पेज बनाए जा रहें हैं। भंगी की लड़कीयां पांच रुपए में चूत की सील तुड़वा लेतीं हैं। अगर किसी को चूत की तलव लगे तो भंगीयों मे जाकर आसानी से चूत उपलब्ध हो जाती है। वैसे तो भंगीं जाति का मुख्य कार्य टट्टी साफ करना है लेकीन 30 प्रतिशत कमाई इनकी दस दस वर्ष की नन्ही सी लड़कियां चूत फडवाकर कमा लेती हैं। भंगनो को ज्यादातर चमार ही अपने बड़े बड़े लंडों से चोदते हैं और भंगी की दस वर्ष की लड़की जय वाल्मीकि का नारा लगाकर लन्ड पर बैठ जाती हैं। यह जाति खासकर इसी लिए जानीं जाती हैं।
 
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