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७.''' विक्रम संवत्''' - इसे '[[मालवा]] संवत्‌' भी कहते हैं। मालवराज ने आक्रामक [[शक|शकों]] को परास्त कर अपने नाम का संवत्‌ चलाया। इसका आरंभ ई.॰ईपू॰ ७५ वर्ष से माना जाता है। [[भारत]] और [[नेपाल]] में यह अत्यधिक लोकप्रिय है। उत्तर भारत में इसका आरंभ चैत्र शुक्ल १ से, दक्षिण भारत में कार्तिक शुक्ल १ से और [[गुजरात]] तथा [[राजस्थान]] के कुछ हिस्सों में आषाढ़ शुक्ल १ (आषाढादि संवत्‌) से माना जाता है।
 
८. '''शक संवत्''' - ऐसा अनुमान किया जाता है कि दक्षिण के [[प्रतिष्ठानपुर]] के राजा [[शालिवाहन]] ने इस संवत्‌ को चलाया। अनेक स्रोत इसे विदेशियों द्वारा चलाया हुआ मानने हैं। [[काठियावाड़]] एवं [[कच्छ]] के शिलालेखों तथा सिक्कों में इसका उल्लेख पाया जाता है। [[वराह मिहिर|वराहमिहिर]] कृत "[[पंचसिद्धांतिका|पंचसिद्धान्तिका]]' में इसका सबसे पहले उल्लेख रहा है। नेपाल में भी इसका प्रचलन है। इसमें १३५ वर्ष जोड़ने से वि॰सं॰ और ७९ वर्ष जोड़ने से ई. सन्‌ बनता है।है।p
 
९. '''कलचुरि संवत्''' - इसे 'चेदि संवत्‌' और 'त्रैकूटक संवत' भी कहते हैं। यह सं. [[गुजरात]], [[कोंकण]] एवं [[मध्य प्रदेश]] में लेखों में मिला है। इसमें ३०७ जोड़ने से वि॰सं॰ तथा २४९ जोड़ने से ई. सन्‌ बनता है।
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