"चक्रवर्ती राजगोपालाचारी" के अवतरणों में अंतर

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== सम्मान ==
 
1954 में भारतीय राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले राजा जी को [[भारत रत्‍न|भारत रत्न]] से सम्मानित किया गया। भारत रत्न पाने वाले वे पहले व्यक्ति थे। वह विद्वान और अद्भुत लेखन प्रतिभा के धनी थे। जो गहराई और तीखापन उनके बुद्धिचातुर्य में था, वही उनकी लेखनी में भी था। वह तमिल और अंग्रेज़ी के बहुत अच्छे लेखक थे। 'गीता' और 'उपनिषदों' पर उनकी टीकाएं प्रसिद्ध हैं। इनके द्वारा रचित ''[[चक्रवर्ति तिरुमगन]]'', जो गद्य में रामायण कथा है, के लिये उन्हें सन् १९५८ में [[साहित्य अकादमी पुरस्कार]] ([[साहित्य अकादमी पुरस्कार तमिल|तमिल]]) से सम्मानित किया गया।<ref name="sahitya">{{cite web | url=http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp | title=अकादमी पुरस्कार | publisher=साहित्य अकादमी | accessdate=11 सितंबर 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20160915135020/http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp | archive-date=15 सितंबर 2016 | url-status=dead }}</ref> उनकी लिखी अनेक कहानियाँ उच्च स्तरीय थीं। 'स्वराज्य' नामक पत्र उनके लेख निरंतर प्रकाशित होते रहते थे। इसके अतिरिक्त नशाबंदी और स्वदेशी वस्तुओं विशेषकर खादी के प्रचार प्रसार में उनका योगदान महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
 
== निधन ==
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
*[https://web.archive.org/web/20180123101606/http://panchjanya.com//Encyc/2018/1/23/Rajgopalchari.aspx हिन्दू-दर्शन और अर्थनीति : चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]
 
{{गवर्नर जनरल}}
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