"वल्लभाचार्य" के अवतरणों में अंतर

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== षोडश ग्रन्थों की टीकाएँ तथा हिंदी अनुवाद ==
 
महाप्रभु वल्लभाचार्य के षोडश ग्रंथों पर [[श्री हरिराय जी]], श्री कल्याण राय जी, श्री पुरुषोत्तम जी, श्रीरघुनाथ जी आदि अनेक विद्वानों द्वारा संस्कृत भाषा में टीकाएं उपलब्ध हैं। सर्वसाधारण के लिए भाषा की जटिलता के कारण ग्रंथों और टीकाओं के मर्म को समझना कठिन रहा है, किन्तु श्री वल्लभाचार्य के ही एक विद्वान वंशज गोस्वामी राजकुमार नृत्यगोपालजी ने प्रत्येक ग्रन्थ की समस्त टीकाओं को न केवल एक जगह संकलित किया है, बल्कि पुष्टिमार्ग के भक्तों तथा अनुयायियों के लाभ के लिए उनका हिंदी अनुवाद भी सुलभ कराया है। क्लिष्ट टीकाओं के हिंदी अनुवाद के साथ अधिक स्पष्टता के लिए उन्होंने प्रत्येक ग्रन्थ पर अपनी स्वयं की टीका भी की है। ये सभी टीकाएँ सोलह पुस्तकों के रूप में छपी हैं। निम्न तालिका में श्री वल्लभाचार्य के ग्रंथों की संग्रहीत टीकाओं के साथ ही श्री राजकुमार नृत्यगोपालजी की टीका का उल्लेख है।<ref>“श्रीमद्वल्लभाचार्य द्वारा प्रणीत षोडश ग्रंथों की मूल सहित संस्कृत टीकाओं का संकलन, हिन्दी अनुवाद तथा सरलीकरण टीका (16 पुस्तकों में)”, गोस्वामी राजकुमार नृत्यगोपालजी, “चरणाट”, ठाकुर विलेज, कांदिवली (पू.), मुम्बई-४००१०१ (महाराष्ट्र)</ref>
 
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