"नौसैनिक तोपखाना" के अवतरणों में अंतर

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===गोलाबारी नियंत्रण का हल===
[[Image:Robins gunnery.jpg|right|thumb|300px|तोपखाने पर बहुत से प्रयोग करने के बाद ब्रितिशब्रिटिश इंजीनियर बेंजामिन रोबिन्स ने सन १७४२ में में तोपखाने के ने सिद्धान्त ([https://archive.org/details/bub_gb_3j8FAAAAMAAJ/page/n56/mode/2up New Principles in Gunnery]) नामक पुस्तक लिखी जिसमें तोपखाने के सभी वैज्ञानिक पहलुओं का वर्णन था। यह पुस्तक यूरोप के नौसैनिक तोपखाने के विकास में बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध हुई।]]
लक्ष्य और जहाज दोनों चलते रहते हैं। इसलिए किसी निश्चित लक्ष्य पर तोप छोड़ने पर वह लक्ष्य से पूर्णतया चूक जाएगा, क्येंकि गोले के लक्ष्य तक पहुँचते पहुँचते लक्ष्य ऐसी स्थिति में आ जाएगा जिसे भावी स्थिति कहते हैं। संगणक प्राप्य आँकड़ों से लक्ष्य की भावी स्थिति की प्राग्युक्ति और लक्ष्य करने के लिए आवश्यक तोप उत्थापन या तोप विनयन की गणना करता है। अर्थ यह हुआ कि वांछित परिणा प्राप्त करने लिए दर्शा (sight) उत्थापन और दर्शा विनयन का संशोधन आवश्यक है। इसकी विधियाँ हैं :
 

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