"कुशीनगर" के अवतरणों में अंतर

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कुशीनगर नामक स्थान अति प्राचीन काल से प्रसिद्ध है । त्रेता युग में भगवान राम के दो पुत्र लव एवं कुश थे उनमें से कुश के द्वारा बसाया हुआ नगर कुशीनगर है । कुश के वंशज ही [[कुशवाहा]] कहलाये कुछ स्थान पर कच्छवाह हो गया। वैदिक काल से सभी कुशवाहा कुश के पुत्र सूर्यवंशी क्षत्रिय वर्ण है
''यह पन्ना कुशीनगर नामक स्थान 1948 के बादबारे सेमें बौद्धहै तीर्थजो एक हिन्दू-बौद्ध बनातीर्थस्थल है। प्रशासनिक जनपद के लिये देखें '''[[कुशीनगर जिला]]'''''
 
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| skyline_caption = '''परिनिर्वाण मंदिर''' के निकट खुदाई में मिली '''बुद्ध प्रतिमा'''
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'''कुशीनगर''' एवं '''कसया बाजार''' [[उत्तर प्रदेश]] के उत्तरी-पूर्वी सीमान्त इलाके में स्थित एक क़स्बा एवं ऐतिहासिक स्थल है। वर्तमान में यह [[कुशीनगर जिला|कुशीनगर जिले]] के अन्तर्गत आता है। "कसिया बाजार" नाम कुशीनगर में बदल गया है और उसके बाद "कसिया बाजार" आधिकारिक तौर पर "कुशीनगर" नाम के साथ नगर पालिका बन गया है। यह [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] [[तीर्थस्थान|तीर्थस्थल]] है जहाँ [[गौतम बुद्ध]] का [[महापरिनिर्वाण]] हुआ था। कुशीनगर, [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]] पर [[गोरखपुर]] से लगभग ५० किमी पूरब में स्थित है। यहाँ अनेक सुन्दर बौद्ध मन्दिर हैं। इस कारण से यह एक अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल भी है जहाँ विश्व भर के बौद्ध तीर्थयात्री भ्रमण के लिये आते हैं। कुशीनगर कस्बे के और पूरब बढ़ने पर लगभग २० किमी बाद [[बिहार]] राज्य आरम्भ हो जाता है।
 
यहाँ बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बुद्ध इण्टरमडिएट कालेज, महर्षि अरविन्द विद्या मंदिर तथा कई छोटे-छोटे विद्यालय भी हैं। कुशीनगर के आस-पास का क्षेत्र मुख्यत: कृषि-प्रधान है। जन-सामन्य की बोली [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]] है। यहाँ [[गेहूँ]], [[धान]], [[गन्ना]] आदि मुख्य फसलें पैदा होतीं हैं।
 
[[बुद्ध पूर्णिमा]] के अवसर पर कुशीनगर में एक माह का [[मेला]] लगता है। यद्यपि यह तीर्थ महात्मा बुद्ध से सम्बन्धित है, किन्तु आस-पास का क्षेत्र [[हिन्दू]] बहुल है। इस मेले में आस-पास की जनता पूर्ण श्रद्धा से भाग लेती है और विभिन्न मन्दिरों में पूजा-अर्चना एवं दर्शन करती है। किसी को संदेह नहीं कि बुद्ध उनके 'भगवान' हैं।
 
कुशीनगर जनपद , गोरखपुर मंडल के अंतर्गत आता है। यह क्षेत्र पहले कुशीनारा के नाम से जाना जाता था जहां बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था। कुशीनगर जिले का प्रशासनिक प्रभाग [[पडरौना]] में है। क्षेत्रफल 2,873.5 वर्ग कि॰मी (1,109.5 वर्ग मील) है तो जनसंख्या 3,560,830 (2011)। साक्षरता दर 67.66 प्रतिशत और लिंगानुपात 955 है। यह एक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है तो सात विधानसभा क्षेत्र- फाजिलनगर, खड्डा, रामकोला, हाटा, कसया, पडरौना, तमकुही राज हैं। जिले में 6 तहसीलें हैं - पडरौना, कुशीनगर, हाटा, तमकुहीराज , खड्डा, कप्तानगंज और 14 विकासखण्ड (block) हैं - पडरौना, बिशुनपुरा, कुशीनगर, हाटा, मोतीचक, सेवरही, नेबुआ नौरंगिया, खड्डा, दुदही, फाजिल नगर, सुकरौली, कप्तानगंज, रामकोला और तमकुहीराज। जिले में ग्रामों की संख्या 1447 हैं।
 
== नाम इतिहास ==
कुशीनगर से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में मल्लों का एक और गणराज्य [[चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्व उद्यान|पावा]] था। यहाँ बौद्ध धर्म के समानांतर ही [[जैन धर्म]] का प्रभाव था। माना जाता है कि जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर [[महावीर|महावीर स्वामी]] ( जो बुद्ध के समकालीन थे) ने पावानगर (वर्तमान में [[फाजिल नगर|फाजिलनगर]] ) में ही परिनिर्वाण प्राप्त किया था। इन दो धर्मों के अलावा प्राचीन काल से ही यह स्थल हिंदू धर्मावलंम्बियों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। गुप्तकाल के तमाम भग्नावशेष आज भी जिले में बिखरे पड़े हैं। लगभग डेढ़ दर्जन प्राचीन टीले हैं जिसे पुरातात्विक महत्व का मानते हुए पुरातत्व विभाग ने संरक्षित घोषित कर रखा है। उत्तर भारत का इकलौता [[सूर्य मंदिर]] भी इसी जिले के [[तुर्कपट्टी]] में स्थित है। भगवान [[सूर्य]] की प्रतिमा यहां खुदाई के दौरान ही मिली थी जो गुप्तकालीन मानी जाती है। इसके अलावा भी जनपद के विभिन्न हिस्सों में अक्सर ही जमीन के नीचे से पुरातन निर्माण व अन्य अवशेष मिलते ही रहते हैं।
 
कुशीनगर जनपद का जिला मुख्यालय [[पडरौना]] है जिसके नामकरण के संबंधसम्बन्ध में यह कहा जाता है कि भगवान राम के विवाह के उपरांतउपरान्त पत्नी सीता व अन्य सगे-संबंधियों के साथ इसी रास्ते [[जनकपुर]] से अयोध्या लौटे थे। उनके पैरों से रमित धरती पहले पदरामा और बाद में पडरौना के नाम से जानी गई। जनकपुर से अयोध्या लौटने के लिए भगवान राम और उनके साथियों ने पडरौना से 10 किलोमीटर पूरब से होकर बह रही [[बांसी नदी]] को पार किया था। आज भी बांसी नदी के इस स्थान को 'रामघाट' के नाम से जाना जाता है। हर साल यहां भव्य मेला लगता है जहां यूपी और बिहार के लाखों श्रद्धालु आते हैं। बांसी नदी के इस घाट को स्थानीय लोग इतना महत्व देते हैं कि 'सौ काशी न एक बांसी' की कहावत ही बन गई है। मुगल काल में भी यह जनपद अपनी खास पहचान रखता था।
[[चित्र:Stupa ruins in Kushinagar.jpg|center|thumb|500px|खुदाई में प्राप्त स्तूपों के भग्नावशेष]]
[[चित्र:City of Kushinagar in the 5th century BCE according to a 1st century BCE frieze in Sanchi Stupa 1 Southern Gate.jpg|right|thumb|300px|[[साँची स्तूप]] से प्राप्त प्रथम शताब्दी ईसापूर्व की एक [[चित्रवल्लरी]] जिसमें कुशीनगर का ५वीं शताब्दी ईसापूर्व का एक दृष्य अंकित है।]]
 
==मैत्रेय-बुद्ध परियोजना==
 
इस जिले में शिक्षा का स्तर काफी तेजी से बढ़ रहा है। बहुत सारे कालेज व शैक्षिण संस्थान हैं। जिनमें बुद्ध डिग्री कॉलेज, उदित नारायण कॉलेज, किसान इंटर कॉलेज प्रमुख हैं। इस जिला में कठकुईयां चीनी मील, रामकोला चीनी मील, पडरौना चीनी मल, खड्डा चीनी मील समेत कई बड़े चीनी मील हैं। इस जिले में [[पडरौना]], [[रामकोला]], [[कठकुईयां]], [[खड्डा]], [[दुदही]], [[तमकुही रोड]], [[पनियहवा]] समेत कई छोटे बड़े रेलवे स्टेशन हैं। कुशीनगर जिला का मुख्यालय रवीन्द्र नगर धूस है। वर्तमान में कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का काम प्रगति पर है
 
=== लोकरंग ===
लोकरंग सांस्कृतिक समिति´ विगत तीन वषों से लोक संस्कृतियों के अन्वेषण, संवर्धन और संरक्षण की दिशा में कार्य कर रही है। किसी भी समाज की लोक संस्कृति, कला और संगीत का उसके मानवीय संवेदनाओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान होता है। हम असीम लिप्सा, धूर्तता, पाखण्ड से आवृत परिवेश में जी रहे हैं, जहां ठहर कर लोकसंस्कृतियों की हिफाजत के लिए वक्त नहीं है। ऐसे में हमारी लोक संस्कृतियां समाप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं। इन्हीं चिन्ताओं को केंन्द्र में रखकर `लोकरंग सांस्कृतिक समिति´ ने ग्राम-जोगिया जनूबी पट्टी, फाजिलनगर, कुशीनगर के ग्रामीण इलाके में हस्तक्षेप किया है। `लोकरंग 2008´ के माध्यम से हमने प्रयास किया था कि पूर्वांचल के, देवीगीत, हुड़का, पखावज, फरी नृत्य, विविध लोकगीतों और नुक्कड़ नाटकों को एक मंच पर लाया जाए और इस दिशा में हम सफल भी हुए थे। `लोकरंग 2009´ में हमने चइता, बिरहा, जोगीरा, कहरवा, कबीर, कजरी और निर्गुन गायकी, एकतारा वादन, जांघिया, धोबियाऊ और फरी नृत्य, विविध लोकगीतों और नाटकों को मंच प्रदान किया। दोनों ही वर्ष हमने विचार गोष्ठियों का आयोजन किया जिनमें देश के महत्वपूर्ण साहित्यकार और लोक कलाकार सम्मिलित हुए।
`'लोकरंग-2010' में पंवरिया, पखावज, हुड़का और अहिरऊ नृत्य, छत्तीसगढ़ी लोकगीत, बुन्देलखण्डी अचरी, बृजवासी, ईसुरी फाग एवं आल्हा गायकी को स्थान दिया गया है। भोजपुरी गीतों को मंच प्रदान करने के लिए तमाम लोक गायकों को आमन्त्रित किया गया है। हमारा प्रयास होगा कि `लोकरंग 2010´ लोकसंगीत /संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
 
== आवागमन ==
5090 गोरखपुर-सिकन्दराबाद एक्सप्रेस -- [[गोरखपुर]] -- [[सिकन्दराबाद]]
 
1016 कुशीनगर एक्सप्रेस -- [[गोरखपुर]] -- [[कुर्ला]] ([[मुम्बई]])
 
5046 गोरखपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस -- [[गोरखपुर]] -- [[अहमदाबाद]]
Image:Burmese Temple in Kushinagar.jpg|महासुखंददा चिन थर्गयि पगोडा (बर्मा मन्दिर)
Image:Watthaikusinara.jpg|वाट थाई मन्दिर
Image:Buddha Relic Distribution Site 02.jpg|Buddhaबुद्ध relicके distributionपुरावशेष siteका वितरण केन्द्र
Image:Kusinara3.jpg|[[निर्वाण|परिनिर्वाण]] के पश्चात इसी स्थान पर एक सप्ताह तक भगवान बुद्ध का शरीर रखा गया था।
</gallery>
* [[कुशीनगर जिला]]
* [[कसया (तहसील), कुशीनगर]]
[[मलुकही]]
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
[[श्रेणी:बौद्ध पवित्र स्थल]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश पर्यटन]]
[[श्रेणी:मलुकही]]

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