"ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस" के अवतरणों में अंतर

Jump to navigation Jump to search
छो
बॉट: पुनर्प्रेषण ठीक कर रहा है
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन यथादृश्य संपादिका
छो (बॉट: पुनर्प्रेषण ठीक कर रहा है)
{{Infobox publisher
| image = [[चित्र:OUP logo.svg]]
| parent = [[ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय|ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय]]
| status =
| founded = 1586
| successor =
| country = [[यूनाइटेड किंगडम]]
| headquarters = [[ऑक्सफ़ोर्ड|ऑक्सफोर्ड]]
| distribution =
| keypeople =
'''ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस''' ('''ओयूपी''') दुनिया की सबसे बड़ी विश्वविद्यालय प्रेस है।<ref>{{cite news|url=http://www.nytimes.com/1994/02/16/news/16iht-presseduc.html|title=400 Years Later, Oxford Press Thrives|last=Balter|first=Michael |date= फ़रवरी 16, 1994|publisher=The New York Times|accessdate=2009-10-21}} {{Dead link|date=अक्टूबर 2010|bot=H3llBot}}</ref> यह [[ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय|ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय]] का एक विभाग है और इसका संचालन उपकुलपति द्वारा नियुक्त 15 शिक्षाविदों के एक समूह द्वारा किया जाता है जिन्हें प्रेस प्रतिनिधि के नाम से जाना जाता है। उनका नेतृत्व प्रतिनिधियों के सचिव द्वारा किया जाता है जो ओयूपी के मुख्य कार्यकारी और अन्य विश्वविद्यालय निकायों के प्रमुख प्रतिनिधि की भूमिका निभाता है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय सत्रहवीं सदी के बाद से प्रेस की देखरेख के लिए इसी तरह की प्रणाली का इस्तेमाल करता आ रहा है।<ref>हैरी कार्टर, ''ए हिस्ट्री ऑफ दी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस'' (ऑक्सफोर्ड, 1975) पी. 137</ref>
 
विश्वविद्यालय ने 1480 के आसपास मुद्रण व्यापार में कदम रखा और बाइबल, प्रार्थना पुस्तकों और अध्ययनशील रचनाओं का प्रमुख मुद्रक बन गया।<ref>कार्टर पास्सिम</ref> इसकी प्रेस द्वारा शुरु की गयी एक परियोजना उन्नीसवीं सदी के अंतिम दौर में ''ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी'' बन गई और बढ़ती लागतों से निपटने के लिए इसने अपना विस्तार जारी रखा। <ref>पीटर सटक्लिफ, ''दी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस: एन इन्फोर्मल हिस्ट्री'' (ऑक्सफोर्ड 1975; 2002 के सुधार के साथ पुनःप्रकाशित) पी. 53, 96-7, 156</ref> नतीजतन अपने शैक्षणिक और धार्मिक शीर्षकों से मेल स्थापित करने के लिए ऑक्सफोर्ड ने पिछले सौ सालों में बच्चों की पुस्तकों, स्कूल की पाठ्य पुस्तकों, संगीत, पत्रिकाओं, वर्ल्ड्स क्लासिक्स सीरीज और सबसे ज्यादा बिकने वाली अंग्रेजी भाषा शिक्षण पाठ्य पुस्तकों का प्रकाशन किया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कदम रखने के फलस्वरूप 1896 में [[नया यॉर्क|न्यूयॉर्क]] से शुरुआत करने वाली इस प्रेस ने [[संयुक्त राजशाही (ब्रिटेन)|यूनाइटेड किंगडम]] के बाहर भी अपना कार्यालय खोलना शुरू कर दिया। <ref>सटक्लिफ, पास्सिम</ref> कंप्यूटर प्रौद्योगिकी के आगमन और उत्तरोत्तर बढ़ती व्यापारिक दशाओं की वजह से 1989 में ऑक्सफोर्ड में स्थित प्रेस के छापेखाने को बंद कर दिया गया और वोल्वरकोट में स्थित उसकी पूर्व कागज़ की मिल को 2004 में ध्वस्त कर दिया गया। अपनी छपाई और जिल्दसाजी कार्य का ठेका देकर आधुनिक प्रेस हर साल दुनिया भर में लगभग 6000 नए शीर्षकों का प्रकाशन करता है और दुनिया भर में इसके कर्मचारियों की संख्या लगभग 4000 है। एक धर्मार्थ संगठन के हिस्से के रूप में ओयूपी अपने मूल विश्वविद्यालय को अधिक से अधिक वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए और इसके अलावा अपनी प्रकाशन गतिविधियों के माध्यम से छात्रवृत्ति, अनुसन्धान और शिक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन करने में विश्वविद्यालय के लक्ष्यों को पूरा करने में उसकी सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है।
 
ओयूपी को सबसे पहले 1972 में यूएस कॉर्पोरेशन टैक्स से और उसके बाद 1978 में यूके कॉर्पोरेशन टैक्स से मुक्त किया गया। एक धर्मार्थ संगठन का एक विभाग होने के नाते ओयूपी को अधिकांश देशों में आयकर और निगम कर से मुक्त कर दिया गया है लेकिन इसे अपने उत्पादों पर बिक्री और अन्य वाणिज्यिक करों का भुगतान करना पड़ता है। प्रति वर्ष कम से कम 12 मिलियन पाउंड का हस्तांतरण करने की वचनबद्धता के साथ यह प्रेस वर्तमान में विश्वविद्यालय के शेष हिस्सों को अपने वार्षिक अधिशेष का 30% हस्तांतरित करता है। प्रकाशन की संख्या की दृष्टि से ओयूपी दुनिया का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय प्रेस है जो हर साल 4500 से अधिक नई पुस्तकों का प्रकाशन करता है और जहां लगभग 4000 लोग काम करते हैं। ओयूपी ''ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी'', ''कंसाइस ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी'', ऑक्सफोर्ड वर्ल्ड्स क्लासिक्स, ''ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ऑफ नेशनल बायोग्राफी'' और ''कंसाइस डिक्शनरी ऑफ नेशनल बायोग्राफी'' सहित कई सन्दर्भ, पेशेवर और शैक्षणिक रचनाओं का प्रकाशन करता है। इसके कई सबसे महत्वपूर्ण शीर्षक अब "ऑक्सफोर्ड रेफरेंस ऑनलाइन" नामक एक पैकेज के रूप में इंटरनेट पर उपलब्ध है और इन्हें यूके की कई सार्वजनिक पुस्तकालयों के पाठक कार्ड धारकों को मुफ्त में प्रदान किया जाता है।
प्रेस ने अब भारी बदलाव के युग में प्रवेश किया। 1830 में भी यह शिक्षा के पिछड़े क्षेत्र का एक संयुक्त स्टॉक प्रिंटिंग व्यवसाय था जो विद्वानों और मौलवियों जैसे पाठकों के अपेक्षाकृत छोटे समूह को विद्वतापूर्ण रचनाओं की पेशकश कर रहा था। एक इतिहासकार के मुताबिक यह प्रेस "शर्मीले रोगभ्रमियों के एक समाज" का उत्पाद था।<ref>सटक्लिफ, पीपी. 1-2, 12</ref> इसका व्यापार बड़े पैमाने पर सस्ते बाइबलों की बिक्री पर निर्भर था और इसके डेलीगेट गैस्फोर्ड या मार्टिन रूथ के प्रतीक थे। वे लंबे समय से काम कर रहे परम्परावादी थे जो हर साल 5 या 10 शीर्षकों को छापने वाले एक विद्वतापूर्ण व्यवसाय की अध्यक्षता कर रहे थे जैसे लिडेल और स्कॉट्स ''ग्रीक इंग्लिश लेक्सिकन'' (1843) और इसके व्यापार का विस्तार करने में उनकी रुचि बहुत कम या नहीं थी।<ref>सटक्लिफ पीपी. 2-4</ref> 1830 के दशक में मुद्रण के लिए वाष्प शक्ति का बेचैन कर देने वाला प्रस्थान जरूर देखा गया होगा। <ref>बार्कर पी. 44</ref>
 
इस समय थॉमस कॉम्बे प्रेस में शामिल हुए और 1872 में अपनी मौत तक विश्वविद्यालय के मुद्रक बने रहे। कॉम्बे ज्यादातर प्रतिनिधियों की तुलना में एक बेहतर व्यवसायी थे लेकिन अभी भी वहां कोई प्रवर्तक नहीं था: वे भारत के कागज़ की विशाल वाणिज्यिक क्षमता को मूर्त रूप देने में नाकामयाब रहे जो परवर्ती वर्षों में ऑक्सफोर्ड के सबसे लाभदायक व्यापारिक रहस्यों में से एक साबित हुआ।<ref>सटक्लिफ पीपी. 39-40, 110-111</ref> फिर भी, कॉम्बे को व्यवसाय में अपने शेयरों के माध्यम से काफी धन प्राप्त हुआ और वोल्वरकोट के दिवालिया पेपर मिल का अधिग्रहण और नवीकरण का काम भी मिला। उन्होंने प्रेस में स्कूलिंग और ऑक्सफोर्ड में सेंट बर्नाबास चर्च की अक्षय निधि का वित्तपोषण किया।<ref>हैरी कार्टर, ''वोल्वरकोट मिल'' चैप्टर 4 (द्वितीय संस्करण, ऑक्सफोर्ड, 1974)</ref> कॉम्बे का धन इतना बढ़ गया कि वे प्री-रफेलिट ब्रदरहूड के पहले संरक्षक बन गए और उन्होंने और उनकी पत्नी मार्था ने इस समूह के आरंभिक कार्यों के अधिकांश हिस्से को खरीद लिया जिनमें विलियम होल्मैन हंट का ''द लाईट ऑफ द वर्ल्ड'' भी शामिल था।<ref>जेरेमी मास, ''होल्मन हंट एंड दी लाईट ऑफ दी वर्ल्ड'' (स्कोलर प्रेस, 1974)</ref> हालांकि कॉम्बे को प्रेस में सुन्दर मुद्रित रचना के उत्पादन में बहुत कम रुचि थी।<ref>सटक्लिफ पी. 6</ref> उनके छापेखाने से जुड़ा सबसे जाना माना ग्रन्थ ''[[एलिसेज़ऐलिसेज़ एडवेंचर्सएड्वैन्चर्स इन वंडरलैंडवण्डरलैण्ड|एलिसेस एडवेंचर्स इन वंडरलैंड]]'' का त्रुटिपूर्ण प्रथम संस्करण था जिसे 1865 में इसके लेखक [[लुइस कैरल|लेविस कैरोल]] (चार्ल्स लुट्विज डोग्सन) के खर्च पर ऑक्सफोर्ड द्वारा मुद्रित किया गया था।<ref>सटक्लिफ पी. 36</ref>
 
प्रेस में आमूल परिवर्तन करने के लिए विश्वविद्यालय के कामकाज पर 1850 के रॉयल कमीशन और एक नए सचिव बार्थोलोम्यू प्राइस को लगाया गया।<ref>बार्कर पीपी. 45-7</ref> 1868 में नियुक्त होने वाले प्राइस ने पहले ही विश्वविद्यालय को सुझाव दिया था कि व्यवसाय की "चौकस अधीक्षण" के लिए एक कुशल कार्यकारी अधिकारी की जरूरत थी जिसमें अलेक्जेंडर मैकमिलन के साथ की जाने वाली सौदेबाजी भी शामिल थी जो 1863 में ऑक्सफोर्ड की छपाई के प्रकाशक बन गए और 1866 में सस्ते और प्राथमिक स्कूली पुस्तकों की क्लेयरेंडन प्रेस श्रृंखला का निर्माण करने में प्राइस की मदद की - शायद ऐसा पहली बार हुआ था जब ऑक्सफोर्ड ने क्लेयरेंडन छपाई का इस्तेमाल किया।<ref>सटक्लिफ पीपी. 19-26</ref> प्राइस के नेतृत्व में प्रेस ने अपना आधुनिक आकार लेना शुरू कर दिया। 1865 तक डेलीगेसी (प्रतिनिधित्व/नुमाइंदगी) का सर्वकालिक होना बंद हो गया और इसकी जगह पांच सर्वकालिक और पांच कनिष्ट पदों का विकास हुआ जिन्हें विश्वविद्यालय की तरफ से होने वाली नियुक्ति के माध्यम से भरा जाता था और इसके साथ ही साथ वाइस चांसलर एक पदेन डेलीगेट होता था: जो गुटबाजी के लिए एक कांचगृह था जिसकी रखवाली और नियंत्रण प्राइस ने बड़ी चतुराई से की। <ref>सटक्लिफ पीपी. 14-15</ref> विश्वविद्यालय ने अपने शेयरों को फिर से खरीद लिया क्योंकि उनके धारक या तो रिटायर हो गए थे या उनका देहांत हो गया था।<ref>बार्कर पी. 47</ref> खातों के पर्यवेक्षण का काम 1867 में नवनिर्मित वित्त समिति को दे दिया गया।<ref>सटक्लिफ पी. 27</ref> कार्य की प्रमुख नई लाइनों की शुरुआत हुई। उदाहरण के लिए, 1875 में डेलीगेटों (प्रतिनिधोयों/नुमाइंदों) ने फ्रेडरिक मैक्स मुलर के संपादकत्व के तहत ''सैक्रेड बुक्स ऑफ द ईस्ट'' श्रृंखला को अनुमोदित किया जिससे एक व्यापक पाठकत्व को धार्मिक विचारों की एक बहुत बड़ी श्रृंखला प्राप्त हुई। <ref>सटक्लिफ पीपी. 45-6</ref>
 
प्राइस ने समान रूप से ओयूपी को इसके खुद के अधिकार में प्रकाशन की तरफ स्थानांतरित किया। 1863 में पार्कर के साथ प्रेस का रिश्ता खत्म हो गया और 1870 में कुछ बाइबल रचनाओं के लिए लन्दन में एक छोटे से जिल्दसाजीखाना को ख़रीदा गया।<ref>सटक्लिफ पीपी 16, 19. 37</ref> मैकमिलन का अनुबंध 1880 में समाप्त हो गया और उसे फिर से नवीकृत नहीं किया गया। इस समय तक, लन्दन के पैटर्नोस्टर रो में बाइबल के भण्डारण के लिए ऑक्सफोर्ड का एक गोदाम भी था और 1880 में इसके प्रबंधक हेनरी फ्राउड को विश्वविद्यालय के प्रकाशक का औपचारिक ख़िताब दिया गया। फ्राउड को पुस्तक व्यापार से न कि विश्वविद्यालय से फायदा हुआ और वे कई लोगों के लिए एक पहेली बनकर रह गए। ऑक्सफोर्ड के स्टाफ मैगजीन "द क्लेयरेंडनियन" के एक मृत्युलेख के अनुसार "यहाँ ऑक्सफोर्ड में हममें से कुछ लोगों के पास ही उनका व्यक्तिगत ज्ञान था".<ref>दी क्लेयरेंडूनियन, 4, संख्या 32, 1927, पी. 47</ref> उसके बावजूद, व्यवसाय में पुस्तकों की नई लाइनों को शामिल करके, 1881 में [[नया नियम|न्यू टेस्टामेंट]] के संशोधित संस्करण के विशाल प्रकाशन की अध्यक्षता करके<ref>सटक्लिफ पीपी. 48-53</ref> और 1896 में ब्रिटेन के बाहर [[नया यॉर्क|न्यूयॉर्क]] में प्रेस का पहला कार्यालय स्थापित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर फ्राउड ओयूपी के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण बन गए।<ref>सटक्लिफ पीपी. 89-91</ref>
 
प्राइस ने ओयूपी को रूपांतरित किया। 1884 में जब वे सचिव के पद से रिटायर हुए तब डेलीगेटों ने व्यवसाय के अंतिम शेयरों को वापस खरीद लिया।<ref>सटक्लिफ पी. 64</ref> पेपर मिल, छापेखाने, जिल्दखाना और गोदाम सहित प्रेस पर अब पूरी तरह से विश्वविद्यालय का स्वामित्व था। स्कूली किताबों और आधुनिक विद्वानों के ग्रंथों जैसे [[जेम्स क्लर्क माक्सवेलमैक्सवेल|जेम्स क्लेर्क मैक्सवेल]] के [[मैक्सवेल के समीकरण|''ए ट्रीटाइज़ ऑन इलेक्ट्रिसिटी एण्ड मैग्नेटिज्म'']] (1873) के शामिल होने से इसका उत्पादन बढ़ गया था जो [[अल्बर्ट आइंस्टीन|आइंस्टीन]] के विचार का मूल सिद्धांत साबित हुआ।<ref>बार्कर पी. 48</ref> इसकी परंपरा और कार्य की गुणवत्ता को छोड़े बिना इसे सरलतापूर्वक स्थापित करके प्राइस ने ओयूपी को एक सतर्क और आधुनिक प्रकाशक के रूप में परिवर्तित करना शुरू कर दिया। 1879 में उन्होंने प्रकाशन का काम भी अपने हाथ में ले लिया जिसके फलस्वरूप वह प्रक्रिया अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई अर्थात् विशाल परियोजना का आगमन हुआ जो ''ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी'' (ओईडी) बना। <ref>सटक्लिफ पीपी. 53-8</ref>
 
जेम्स मुर्रे और फिलोलॉजिकल सोसाइटी द्वारा ऑक्सफोर्ड को प्रदान किया गया "न्यू इंगलिश डिक्शनरी" एक शानदार शैक्षिक और देशभक्ति का काम था। लंबी बातचीत के फलस्वरूप एक औपचारिक अनुबंध की स्थापना हुई। मुर्रे को एक रचना को सम्पादित करना था जिसमें लगभग 10 साल का समय लगने वाला था और जिसकी लागत लगभग 9000 पाउंड थी।<ref>सटक्लिफ पीपी. 56-7</ref> दोनों आंकड़े बहुत ज्यादा आशावादी लग रहे थे। यह डिक्शनरी 1884 में मुद्रित रूप में दिखाई देने लगी लेकिन पहला संस्करण मुर्रे की मौत के 13 साल बाद 1928 तक पूरा नहीं हुआ जिसकी लागत लगभग 375000 पाउंड थी।<ref>साइमन विनचेस्टर, ''दी मीनिंग ऑफ एवरीथिंग - दी स्टोरी ऑफ़ दी ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी'' (ऑक्सफोर्ड, 2003)</ref> यह विशाल वित्तीय बोझ और इसके निहितार्थ प्राइस के उत्तरिधिकारियों के कंधे पर आ गया।
फ्राउड को कोई शक नहीं था कि लन्दन में प्रेस का व्यवसाय काफी हद तक बढ़ गया था और बिक्री के आरम्भ के साथ अनुबंध पर नियुक्त किया गया था। सात साल बाद विश्वविद्यालय के प्रकाशक के रूप में फ्राउड एक छाप के रूप में अपने खुद के नाम के साथ-साथ 'ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस' का इस्तेमाल कर रहे थे। यह शैली हाल के दिनों तक कायम थी और प्रेस के लन्दन कार्यालयों से दो प्रकार के छापों की उत्पत्ति हो रही थी। 'विश्वविद्यालय के प्रकाशक' के नाम से जाने जाने वाले अंतिम व्यक्ति जॉन गिल्बर्ट न्यूटन ब्राउन थे जो अपने सहकर्मियों के बीच 'ब्रुनो' के नाम से जाने जाते थे। छापों के द्वारा गर्भित भेद सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण थे। कमीशन (उनके लेखकों द्वारा या किसी पढ़े-लिखे व्यक्तियों के समूह द्वारा भुगतान) पर लन्दन द्वारा जारी किए जाने वाले पुस्तकों की शैली पर 'हेनरी फ्राउड' या 'हम्फ्री मिलफोर्ड' की छाप थी जिस पर ओयूपी का कोई उल्लेख नहीं था मानो प्रकाशक उन्हें अपने आप जारी कर रहे थे जबकि विश्वविद्यालय के शीर्षक के अधीन प्रकाशकों द्वारा जारी किए जाने वाले पुस्तकों पर 'ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस' की छाप थी। इन दोनों श्रेणियों को ज्यादातर लन्दन द्वारा नियंत्रित किया जाता था जबकि ऑक्सफोर्ड (व्यावहारिक दृष्टि से सचिव) क्लेयरेंडन प्रेस पुस्तकों की देखभाल करता था। कमीशन किताबों का मकसद लन्दन व्यवसाय के ऊपरी खर्चों को वित्तपोषित करने के लिए कामधेनु गाय की तरह काम करना था क्योंकि प्रेस ने इस प्रयोजन के लिए अलग से किसी संसाधन की व्यवस्था नहीं की थी। फिर भी फ्राउड विशेष रूप से इस बात पर ध्यान देते थे कि उनके द्वारा प्रकाशित सभी कमीशन पुस्तकों को प्रतिनिधियों का अनुमोदन प्राप्त हो। यह विद्वानों या पुराविदों के प्रेसों के लिए कोई असामान्य व्यवस्था नहीं थी।{{citation needed|date=दिसम्बर 2010}}
 
प्राइस ने तुरंत बाइबल के संशोधित संस्करण के कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस के साथ संयुक्त रूप से निकटवर्ती प्रकाशन के लिए फ्राउड को प्रधानता दी जिसके इस हद तक एक 'बेस्टसेलर' होने की सम्भावना थी जिसे मांग के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए प्रेस के सभी संसाधनों को काम में लगाने की जरूरत पड़ती. यह 1611 के प्राधिकृत संस्करण को अधिक्रमित करते हुए सबसे पुराने मूल यूनानी और हिब्रू संस्करणों से बाइबल ग्रन्थ का एक सम्पूर्ण पुनरानुवाद था। फ्राउड की एजेंसी को ठीक समय पर संशोधित संस्करण के लिए स्थापित किया गया जिसे 17 मई 1881 को प्रकाशित किया गया और प्रकाशन से पहले और तब से एक खतरनाक दर पर इसकी एक मिलियन प्रतियों की बिक्री हुई हालांकि अत्यधिक उत्पादन की वजह से अंत में लाभ में कमी आ गई।{{citation needed|date=दिसम्बर 2010}} हालांकि फ्राउड किसी भी तरह से एक ऑक्सफोर्ड व्यक्ति नहीं थे और ऐसा होने का कोई सामाजिक मिथ्याभिमान नहीं था लेकिन फिर भी वह एक अच्छे व्यवसायी थे जो सतर्कता और उद्यम के बीच के जादूई संतुलन को प्रभावित करने में सक्षम थे। उनके मन में बहुत पहले से ही प्रेस के विदेशी व्यापार को सबसे पहले यूरोप में और उसके बाद लगातार अमेरिका, कनाडा, भारत और अफ्रीका में उन्नत बनाने का विचार हिलोर मार रहा था। अमेरिकी शाखा के साथ-साथ [[एडिनबरा|एडिनबर्ग]], [[टोरोंटो|टोरंटो]] और [[मेलबॉर्न|मेलबोर्न]] में डिपो स्थापित करने का एकमात्र श्रेय काफी हद तक उन्हीं पर था। फ्राउड ने लेखकों से निपटने, जिल्दसाजी, वितरण और विज्ञापन सहित ओयूपी की छाप वाली किताबों के लिए अधिकांश प्रचालन तंत्रों को नियंत्रित किया और केवल संपादकीय कार्य और छपाई की देखरेख का काम ऑक्सफोर्ड द्वारा किया गया।{{citation needed|date=दिसम्बर 2010}}
 
फ्राउड ऑक्सफोर्ड को नियमित रूप से पैसे भेजते थे लेकिन उन्होंने निजी तौर पर महसूस किया कि इस व्यवसाय की पूंजी काफी कम थी और अगर इसे एक वाणिज्यिक आधार नहीं मिला तो यह बहुत जल्द विश्वविद्यालय के संशाधनों को खाली कर देगा। उन्हें खुद एक निर्धारित सीमा तक व्यवसाय में पैसों का निवेश करने की अधिकार था लेकिन पारिवारिक परेशानियों की वजह से वे ऐसा नहीं कर पा रहे थे। इसलिए विदेशी बिक्री में उनकी रुचि जगी क्योंकि 1880 और 1890 के दशकों तक भारत में पैसा बनाने का अवसर था जबकि यूरपीय पुस्तक बाजार मंदी की मार झेल रहा था। लेकिन प्रेस के फैसले से फ्राउड की दूरी का मतलब था कि जब तक कोई प्रतिनिधि उनकी तरफदारी नहीं करता तब तक वे इस नीति को प्रभावित करने में असमर्थ थे। फ्राउड ने अपना ज्यादातर समय प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए जनादेश के तहत काम करने में बिताया. 1905 में पेंशन के लिए आवेदन करते समय उन्होंने तत्कालीन वाइस चांसलर जे. आर. मैग्राथ को लिखा कि बाइबल वेयरहाउस के प्रबंधक के रूप में उनके सात साल के कार्यकाल में लन्दन व्यवसाय की बिक्री का औसत लगभग 20000 पाउंड और लाभ का परिमाण 1887 पाउंड प्रति वर्ष था। 1905 तक प्रकाशक के रूप में उनके प्रबंधन के तहत बिक्री का परिमाण 200000 पाउंड प्रति वर्ष पहुँच गया था और उनके 29 साल के कार्यकाल में लाभ के परिमाण का औसत 8242 प्रति वर्ष पहुँच गया था।
कमी से राहत मिलने के बजाय 1920 के दशक में सामग्रियों और श्रम की कीमतें आकाश छूने लगी। खास तौर पर कागज़ मिलना मुश्किल हो गया था और उसे व्यापारिक कंपनियों के माध्यम से दक्षिण अमेरिका से मंगाना पड़ता था। 1920 के दशक के अंतिम दौर में अर्थव्यवस्था और बाजारों की हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। 1928 में प्रेस में छपी सामग्रियों को लन्दन, एडिनबर्ग, [[ग्लासगो]], लीप्ज़िग, टोरंटो, मेलबोर्न, [[केपटाउन|केप टाउन]], बम्बई, कलकत्ता, मद्रास और शंघाई में पढ़ा जाता था। इनमें से सभी पूर्ण विकसित शाखाएं नहीं थीं: लीप्ज़िग में एक डिपो था जिसे एच. बोहून बीट द्वारा चलाया जाता था और कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में शहरों में छोटे-छोटे क्रियाशील डिपो और कंपनियों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों के साथ-साथ प्रेस के स्टॉक को बेचने के लिए ग्रामीण स्थिरता की जानकारी रखने वाले शैक्षिक प्रतिनिधियों की एक सेना थी जिनकी एजेंसियों पर प्रेस का कब्ज़ा था जिनमें अक्सर काल्पनिक और हल्की-फुल्की पठनीय सामग्रियां शामिल थीं। भारत में बम्बई, मद्रास और कलकत्ता के शाखा डिपो बड़े स्टॉक सूची के साथ प्रतिष्ठानों को प्रभावित कर रहे थे क्योंकि प्रेसिडेंसियां खुद बड़ी बाजार थीं और वहां शैक्षिक प्रतिनिधि ज्यादातर दूरस्थ व्यापार से निपटते थे। 1929 की मंदी ने अमेरिकास के मुनाफे को धीरे-धीरे खत्म कर दिया और भारत अन्य दिर्ष्टि से एक निराशाजनक तस्वीर का 'एक उज्जवल स्थान' बन गया। बम्बई अफ्रिकास के वितरण और ऑस्ट्रेलेशिया की प्रगतिशील बिक्री का केन्द्र बिंदु था और तीन प्रमुख डिपो पर प्रशिक्षित व्यक्ति बाद में अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया के अग्रगामी शाखाओं में स्थानांतरित हो गए।<ref>मिलफोर्ड का लेटरबुक</ref>
 
प्रेस ने [[द्वितीय विश्वयुद्ध]] में [[पहला विश्व युद्ध|प्रथम विश्वयुद्ध]] की तरह अनुभव किया, फर्क सिर्फ इतना था कि मिलफोर्ड अब रिटायर होने वाले थे और उन्हें 'युवा व्यक्तियों के गमन से नफरत थी'. इस बार लन्दन में होने वाला हवाई आक्रमण बहुत ज्यादा खतरनाक था और लन्दन व्यवसाय को अस्थायी रूप से ऑक्सफोर्ड स्थानांतरित कर दिया गया था। अब अत्यंत अस्वस्थ हो चुके और कई व्यक्तिगत शोकों में डूबे मिलफोर्ड ने युद्ध के अंत तक रूकने और व्यवसाय को चलाते रहने पर जोर दिया। पहले की तरह सभी चीजों की आपूर्ति कम थी लेकिन यू-नाव संकट ने शिपिंग को दोगुना अनिश्चित बना दिया और पत्र पुस्तिकाएं समुद्र में खो चुके खेपों के मातमी रिकॉर्ड से भरे हुए हैं। कभी-कभी किसी लेखक के साथ-साथ दुनिया के युद्ध के मैदानों में अब विखर चुके कर्मचारियों के भी लापता या मृत होने की खबर दी जाएगी. डोरा, क्षेत्र रक्षा अधिनियम, को आयुध निर्माण के लिए सभी गैर जरूरी धातु को समर्पित करने की जरूरत थी और कई कीमती इलेक्ट्रोटाइप प्लेटों को सरकार के आदेश पर पिघला दिया गया।
 
युद्ध के अंत के साथ मिलफोर्ड की जगह जियोफ्री कम्बरलेग ने ले ली। इस दौरान साम्राज्य के विभाजन के बावजूद एकीकरण और युद्ध के बाद राष्ट्रमंडल का पुनर्गठन देखने को मिला। ब्रिटिश काउंसिल जैसे संस्थानों के साथ मिलकर ओयूपी ने शिक्षा बाजार में खुद को स्थिति को फिर से मजबूत करना शुरू कर दिया। अपनी पुस्तक ''मूविंग द सेंटर: द स्ट्रगल फॉर कल्चरल फ्रीडम'' में न्गुगी वा थियोंगो ने दर्ज किया है कि किस तरह अफ्रीका के ऑक्सफोर्ड पाठकों ने अपनी विशाल आंग्ल-केंद्रित विश्वदृष्टि से उन्हें केन्या के एक बच्चे की तरह प्रभावित किया।<ref>नगुगी वा थिओंगो, वान्ग्यू वा गोरो और नगुगी वा थिओंगो द्वारा गिकुयु से अनुवादित '''मूविंग दी सेंटर: दी स्ट्रगल फॉर कल्चर फ्रीडम'' ' में 'इम्पीरीअलिज़म ऑफ लैंग्वेज', (लंदन: कर्रे, 1993), पी. 34.</ref> उसके बाद से यह प्रेस दुनिया भर में फैलने वाले विद्वान और सन्दर्भ पुस्तक बाजार के सबसे बड़े खिलाड़ियों में से एक के रूप में उभर गया है।
85,949

सम्पादन

दिक्चालन सूची