"पादप कार्यिकी" के अवतरणों में अंतर

Jump to navigation Jump to search
176 बैट्स् जोड़े गए ,  1 वर्ष पहले
छो
बॉट: पुनर्प्रेषण ठीक कर रहा है
छो (बॉट: पुनर्प्रेषण ठीक कर रहा है)
[[Image:Kiemtafel (germination table).jpg|right|thumb|300px|अंकुरण दर का एक प्रयोग]]
'''पादप क्रिया विज्ञान''' या '''पादपकार्यिकी''' (Plant physiology), [[वनस्पति विज्ञान]] की वह शाखा है जो [[पादप||पादपों]] के [[शरीरक्रिया विज्ञान|कार्यिकी]] (physiology) से सम्बन्धित है। पादप कार्यिकी में पौधों में होने वाली विभिन्न प्रकार की जैविक क्रियाओं (Vital Activities) का अध्ययन किया जाता है। पादप क्रियाविज्ञान का अध्ययन सर्वप्रथम स्टीफन हेल्स (Stephen Hales) ने किया। उन्होंने प्रथम बार अपने भौतिकी व संख्यिकी के ज्ञान के आधार पर प्रयोगात्मक विधियां ज्ञात की जिनसे पौधों में होने वाले परिवर्तन जैसे पौधों में रसों (Saps) की गति, वाष्पोत्सर्जन दर, पौधों में [[रसारोहण]] क्रिया में मूलदाब व केशिका बल को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
 
==जैविक क्रियाएँ==
[[वनस्पति कोशिका|पादप कोशिका]] में होने वाले सभी [[रासायन्निक परिवर्तन|रासायनिक]] एवं [[भौतिक परिवर्तन]] तथा पादप अथवा पादप कोशिका एवं वातावरण (environment) के बीच सभी प्रकार का आदान-प्रदान जैविक क्रिया के अन्तर्गत आते हैं। जैविक क्रियाएंं निम्नलिखित होती है:-
 
*'''रसायनिक परिवर्तन''' : रसायनिक परिवर्तन के अंतर्गत [[प्रकाश-संश्लेषण|प्रकाश संश्लेषण]], [[पाचन]], [[कोशिकीय श्वसन|श्वसन]], प्रोटीन, वसा तथा हॉरमोन्स पदार्थों का संश्लेषण अदि आते हैं।
 
* '''भौतिक परिवर्तन''' : भौतिक परिवर्तन के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की गैसें कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन, तथा [[परासरण]], [[वाष्पोत्सर्जन]], [[रसारोहण]], खनिज तत्व एवं जल का अवशोषण आदि।
85,672

सम्पादन

दिक्चालन सूची