"सिंधु जल समझौता" के अवतरणों में अंतर

Jump to navigation Jump to search
सम्पादन सारांश रहित
[[चित्र:Indus.A2002274.0610.1km.jpg|दाएँ|378x378पिक्सेल|भारत और पाकिस्तान में सिंधु नदी बेसिन की उपग्रह द्वारा ली गयी छवि]]
 
'''सिन्धु जल संधि''', नदियों के जल के वितरण लिए [[भारत]] और [[पाकिस्तान]] के बीच हुई एक [[सन्धि (समझौता)|संधि]] है। इस सन्धि में [[विश्व बैंक]] (तत्कालीन 'पुनर्निर्माण और विकास हेतु अंतरराष्ट्रीय बैंक') ने मध्यस्थता की।<ref>{{Cite web|url=http://wrmin.nic.in/index3.asp?subsublinkid=287&langid=1&sslid=443|title=Text of 'Indus Water Treaty', Ministry of water resources, Govt. of India|date=|accessdate=2013-02-01|accessdate=2013-02-01}}</ref><ref name="guardian">[http://www.guardian.co.uk/world/2002/jun/03/kashmir.india1 War over water] द गार्डियन, Monday 3 June 2002 01.06 BST</ref> इस संधि पर [[कराची]] में 19 सितंबर, 1960 को [[भारत के प्रधान मंत्री|भारत के प्रधानमंत्री]] [[जवाहरलाल नेहरू]] और [[पाकिस्तान के राष्ट्रपति]] [[अयूब ख़ान (पाकिस्तानी शासक)|अयूब खान]] ने हस्ताक्षर किए थे।
 
इस समझौते के अनुसार, तीन "पूर्वी" नदियों — [[ब्यास नदी|ब्यास]], [[रावी नदी|रावी]] और [[सतलुज नदी|सतलुज]] — का नियंत्रण भारत को, तथा तीन "पश्चिमी" नदियों — [[सिन्धु नदी|सिंधु]], [[चनाब नदी|चिनाब]] और [[झेलम नदी|झेलम]] — का नियंत्रण पाकिस्तान को दिया गया। हालाँकि अधिक विवादास्पद वे प्रावधान थे जनके अनुसार जल का वितरण किस प्रकार किया जाएगा, यह निश्चित होना था। क्योंकि पाकिस्तान के नियंत्रण वाली नदियों का प्रवाह पहले भारत से होकर आता है, संधि के अनुसार भारत को उनका उपयोग [[सिंचाई]], परिवहन और बिजली उत्पादन हेतु करने की अनुमति है। इस दौरान इन नदियों पर भारत द्वारा परियोजनाओं के निर्माण के लिए सटीक नियम निश्चित किए गए। यह संधि पाकिस्तान के डर का परिणाम थी कि नदियों का आधार (बेसिन) भारत में होने के कारण कहीं युद्ध आदि की स्थिति में उसे सूखे और अकाल आदि का सामना न करना पड़े।

दिक्चालन सूची