"सामाजिक संघटन" के अवतरणों में अंतर

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टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन यथादृश्य संपादिका
[[समाजशास्त्र]] में, '''सामाजिक संघटन''' एक सैद्धांतिक अवधारणा होती है जिसके अंतर्गत एक [[समाज]] या सामाजिक संरचना को एक "क्रियाशील संघटन" के रूप में देखते हैं। इस दृष्टिकोण से, आदर्शतः, सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, सामाजिक विशेषताओं, जैसे [[विधि|कानून]], [[परिवार]], [[अपराध]] आदि, के संबंधों का निरीक्षण समाज के अन्य लक्षणों के साथ पारस्परिक क्रिया के दौरान किया जाता है। एक समाज या सामाजिक संघटन के सभी अवयवों का एक निश्चित प्रकार्य होता है जो उस संघटन के स्थायित्व और सामंजस्य को बनाये रखता है।
 
इलियट तथा मैरिल के अनुसार " [https://www.kailasheducation.com/2019/10/samajik-sangathan-arth-paribhasha.html सामाजिक संगठन] वह दशा या स्थिति है, जिसमें एक समाज में विभिन्न संस्थाएं अपने मान्य तथा पूर्व निश्चित उद्देश्यों के अनुसार कार्य कर रही होती है।
 
== इतिहास ==
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