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इसकी स्थापना १ नवम्बर १९६६ को हुई। इसे भाषायी आधार पर [[पूर्वी पंजाब]] से नये राज्य के रूप में बनाया गया।<ref>{{cite book|url=http://books.google.co.in/books?id=HxlIAAAAIAAJ|title=Haryana, ancient and medieval|author=एच॰ए॰ फड़के|publisher=हरमन पब्लिशिंग हाउस|year=१९९०|isbn=81-85151-34-2|page=३३|language=अंग्रेज़ी|trans-title=हरियाणा, प्राचीन और मध्यकालीन|quote=As Haryana or the ancient Kuru janapada....}} ISBN 978-81-85151-34-2</ref><ref>{{cite book |chapter = Kuru Janapad (कुरू जनपद) |page = २, ३ & ७) |title=Buddhist remains from Haryana |trans-title=हरियाणा से बौद्ध अवशेष |author=देवेन्द्र हांडा |publisher =संदीप प्रकाशन |year=२००४ (मूल प्रकाशन मिशिगन विश्वविद्यालय द्वारा ३ सितम्बर २००८ को अंकीकृत किया गया।) |quote= If the Buddhist texts are to be relied upon, it may be said that Buddhism reached Haryana through the Buddha himself. (पृष्ठ 3)<br/>Dipavamsa refers to Buddha's visit to a city in the Kuru country where he received alms on the banks of the Anotatta lake which he crossed. The city may have been Kurukshetra..... (पृष्ठ 3)<br/>We shall see subsequently that Agroha was an important Buddhist centre of Haryana.....Buddhaghosha's candid confession that even a single monastery could not be set up in the Kuru country during the lifetime of Tathagata who was obliged to stay in the hermitage of a Brahmana.... (पृष्ठ ७)|isbn=9788175741539|language=अंग्रेज़ी |url=https://books.google.co.in/books?ei=BxbJVNmvGIH_8QWGzoDgBw}}</ref><ref>{{cite book|title=Buddhist sites and shrines in India: history, art and architecture|author=डी॰सी॰ अहीर|publisher=श्री सतगुरु पब्लिकेशन्स|year=२००३|isbn=81-7030-774-0|page=११५|language=अंग्रेज़ी|trans-title=भारत में बौद्ध स्थल एवं मंदिर: इतिहास, कला और स्थापत्य कला|quote=The ancient Kuru janapada is said to have comprised Kurukshetra, Thanesar, Karnal, Panipat, Sonipat.....}} ISBN 978-81-7030-774-7</ref> शब्द हरियाणा सर्वप्रथम १२वीं सदी में [[अपभ्रंश]] लेखक [[विबुध श्रीधर]] ([[विक्रम संवत|विसं]] ११८९–१२३०) ने उल्लिखीत किया था।<ref>{{Cite journal| title=An Early Attestation of the Toponym Ḍhillī, |trans-title=दिल्ली स्थान के प्रारम्भिक साक्ष्य |author=रिचर्ड जे॰ कोहेन |publisher= जर्नल ऑफ़ द अमेरिकन ओरियण्टल सोसाइटी |year=१९८९ |page=५१३–५१९ |quote=हरियाणए देसे असंखगाम, गामियण जणि अणवरथ काम।<br/>परचक्क विहट्टणु सिरिसंघट्टणु, जो सुरव इणा परिगणियं।<br/>रिउ रुहिरावट्टणु बिउलु पवट्टणु, ढिल्ली नामेण जि भणियं।<br/>अनुवाद: हरियाणा राष्ट्र में अनगिनत गाँव हैं। वहाँ के लोग कड़ी मेहनत करते हैं। वो अन्य प्रभुत्व को स्वीकार नहीं करते और शत्रु का रक्त बहाने में विशेषज्ञ हैं। इन्द्र स्वयं इस राष्ट्र की स्तुति करते हैं। इस देश की राजधानी दिल्ली है।}}</ref>
 
=== उत्पत्ति ===
=== उत्पत्ति ==भारत के महाकाव्य महाभारतमे हरियाणा का उल्लेख बहुधान्यकऔर बहुधनके रूप में किया गया
शब्द ''हरियाणा'' का अहिराणा/अहिराना का ही परिवर्तित रूप है जो कि इस क्षेत्र में निवास करने वाली बहादुर जाति अहीर के निवास स्थान के रूप में जाना जाता था | अहीर भगवान श्रीकृष्ण के वंशज माने जाते हैं |
 
=== प्राचीन इतिहास ===

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