"मृत्यु": अवतरणों में अंतर

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[[चित्र:Ankh.svg|thumb|100px|आँख "अनन्त जीवन के लिए प्राचीन मिस्र के प्रतीक है।" वे और कई अन्य संस्कृतियों के बाद से एक पोर्टल के रूप में एक जीवन के बाद में जैविक मौत देखी है।]]
 
मृत्यु == शरीर के वृध्द हो जाने पर या फिर शरीर के अंगों के क्षतिग्रस्त हो जाने पर प्राण शक्ति शरीर से निकाल जाती है इस क्रिया में सबसे पहले ह्रदय से इच्छाओं का आना बंद हो जाती है फिर शरीर की इन्द्रियां आंख नाक कान आदि काम करना बंद कर देते है फिर चेतना की समझने की शक्ति खत्म हो जाती है फिर सभी तरह सफेद रोशनी हो जाती है मानो हजारों सूर्य निकाल आए है ये मात्र कुछ क्षण मात्र के लिए होता ऐसा लगाता है कुछ नहीं है बहुत खुशी होती है जिसे दुनिया का सभी नाशा व खुशी मिल गई हो इसमें शरीर ही नहीं होता है ।
परन्तु इसके बाद पुनः नए शरीर में स्वतः जाना होता है ।
जन्म ===जो मर गया है वही तत्काल जन्म लेता है परन्तु जब माता शिशु के शरीर को जन्म देती है तभी उसमें प्राण शक्ति प्रवेश करती है फिर शिशु फिर बालक फिर किशोर फिर पौढ़ फिर वृध्द फिर मृत्यु कोई पहले भी मृत्यु को प्राप्त कर लेता है ।
 
जिन मनुष्यों की आत्मा भटकती है वे भी मनुष्य जन्म में होते है मात्र जब वे सोते है तो उनका मन पूर्व जन्म के स्थान जाकर प्रेत भूत आत्मा रूप में भटकता है या लोगों को नुकसान पहुंचता है परन्तु उठाने पर वहां मन वापस आ जाता है स्वयं को भी ज्ञात नहीं होता है की मेरा मन भटकती आत्मा है ।
 
== बुढ़ापा ==

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