"उपभोक्ता" के अवतरणों में अंतर

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* '''सुनवाई का अधिकार''' : सुनवाई का अधिकार : इस अधिकार को तीन विभिन्न अर्थों में समझा जा सकता है। व्यापक अर्थ में इसका अर्थ है कि जब भी सरकार एवं सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा उपभोक्ता के हितों को प्रभावित करने वाले निर्णय लिए जाएं तो उपभोक्ता से सलाह ली जाय। उपभोक्ताओं का यह भी अधिकार है कि निर्माता, विक्रेता एवं विज्ञापनकर्ता उत्पादन एवं विपणन सम्बन्धी निर्णय लेते समय उनके विचार जानें। तीसरे, उपभोक्ताओं की शिकायतों की सुनवाई के समय अदालती कार्यवाही के मध्य उनकी सुनवाई का भी उनका
 
* '''निवारण का अधिकार''' : जब भी किसी उपभोक्ता को अनुचित व्यापार व्यवहार, जैसे अधिक मूल्य वसूलना, घटिया गुणवत्ता वाले अथवा असुरक्षित उत्पादों को बेचना, वस्तु एवं सेवाओं की आपूर्ति में नियमितता की कमी के सम्बंध में कोई शिकायत है या फिर उसे दोषपूर्ण अथवा मिलावटी वस्तुओं के कारण कोई हानि हुई है अथवा चोट पहुंची है तो उसे उनके निवारण का अधिकार है। उसे दोषपूर्ण वस्तुओं के स्थान पर दूसरी वस्तु अथवा विक्रेता द्वारा मूल्य वापसी को प्राप्त करने का अधिकार है। उसे उचित न्यायालय में वैधानिक समाधान पाने का भी अधिकार है। यह अधिकार उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाता है कि उनकी शिकायत पर उचित ध्यान दिया जायेगा। इस अधिकार में यदि आपूर्तिकर्ता अथवा विनिर्माता की गलती के कारण उन्हें कोई हानि होती है अथवा किसी कठिनाई का सामना करना पड़ता है तो उपभोक्ता के लिए उचित क्षतिपूर्ति का भी प्रावधान है।
 
* '''उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार''' : बाजार में दोषपूर्ण कार्यों एवं उपभोक्ताओं के शोषण को रोकने के लिए उपभोक्ताओं में जागरूकता पैदा करना एवं उनको शिक्षित करना बहुत आवश्यक है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उपभोक्ता संगठन, शैक्षणिक संस्थान एवं सरकारी नीति निर्धारकों से अपेक्षा है कि वे उपभोक्ताओं को निम्नलिखित विषयों से अवगत कराएं और उनके विषय में शिक्षित करें।
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