"बहूरानी (1963 फ़िल्म)" के अवतरणों में अंतर

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'''बहूरानी ''' १९६३ में बनी [[हिन्दी भाषा]] की फिल्म है। यह एक ऐसे लड़के के बारे में है जिसके माँ बाप उसका विवाह एक गाव की लड़की से करवा देते है। क्योंकि दूल्हा इस बात से खुश नहीं, इस कारण वो दहेज़ में आये सोने को नकली बताकर तलाक लेने की कशिश करता है। फिर दुल्हन व उसका भाई उसे समझाते हैं कि वो भी शहर की लड़की बन सकती है।<ref>http://www.imdb.com/title/tt0349122/plotsummary</ref>
== संक्षेप == बहुरानी (1963)
 
फिल्म का प्लॉट- एक ज़मींदार ([[नज़ीर हुसेन]]) जिसके दो बेटे थे! एक पहली पत्नी का जो गुजर चुकी है, उसके बेटे का नाम रघु([[गुरू दत्त]]) है, और दूसरी पत्नी जिसका नाम राजेश्वरी([[ललिता पँवार]]) है! उसका एक बेटा है जिसका नाम विक्रम([[फ़िरोज़ खान]]) है, जो गुस्सेल, घमंडी है! रघु पागल है! और राजेश्वरी का सौतेला बेटा है! वह उसके साथ सौतेला व्यवहार करती है! अक्सर उसका सौतेला छोटा भाई विक्रम उसे चाबुक से मरता रहता है! रघु को उसकी दाई माँ([[आघा]]) उसे पालती व उसका ध्यान रखती है! घर के कोई भी नोकर राजेश्वरी के डर से ज़मींदार को उनकी हरकतों के बारे में नही बताते! एक बार विक्रम गांव वालों से लगान वसूल करने जाता है, जहां वह एक किसान जो वैद भी है! को लगान नही देने के कारण पिटता है, उस किसान की बेटी जिसका नाम पदमा([[माला सिन्हा]]) है उसे दुत्कारती है, और गांव वालों के साथ मिलकर उसे वहां से भगा देती है, विक्रम के साथ एक नोकर([[मुहम्मद उमर मुकरी]]) भी होता है! नोकर घर आकर ज़मींदार को वहाँ का हाल बताता है व उस लड़की की तारीफ करता है, और कहता है - वो दुर्गा का उपासक है लेकिन उस लड़की में साक्षात माँ दुर्गा के दर्शन किये हैं! ज़मींदार को लड़की पसन्द आ जाती है, तथा वह रिश्ता लेकर उस वैद के पास जाता है, उस लड़की को पसंद करके उसे अपने घर की बहू बनाने का वचन दे देता है! घर आकर वह राजेश्वरी से कहता की उसने विक्रम के लिए एक लड़की पसन्द की है, और राजेश्वरी उस लड़की के खानदान तथा उसकी धन-सम्पति के बारे में पूछती है, तो ज़मींदार कहता है - धन की किसे पड़ी है, धन तो उसके पास बहुत है, लड़की संस्कारी है! घर की इज़्ज़त रखेगी! पर राजेश्वरी नही मानती, उस पर ज़मींदार कहता है कि वह लड़की के पिता को वचन दे चुका है, और वह अपना वचन नही तोड़ सकता, राजेश्वरी उसे कहती है, बेटे की शादी का ही तो वचन दिया है, रघु के साथ उसकी शादी कर दो, ज़मींदार विवश होकर रघु के साथ उस लड़की की शादी कर देता है, मंडप पर रघु की पागलो वाली हरकत पर लोग हंसते है, वैद को पता चलने पर वह उस लड़की(पदमा) से शादी तोड़ने को कहता है, परन्तु पदमा शादी नही तोड़ती! ससुराल जाने पर पदमा की सासु राजेश्वरी उस पर अपमान करती है! फिर पदमा को अगले दिन दाई माँ सब सच बताती है की रघु की माँ उसे बचपन में ही छोड़कर चल बसी! ज़मींदार ने रघु की माँ को वचन दिया कि वह दूसरी शादी नही करेगा, लेकिन घर की परिस्थितयों के कारण उसे दूसरी शादी करनी पड़ी! राजेश्वरी हमेशा रघु पर ज़ुल्म करती रही, उसे दूध में अफ़ीम मिलाकर पाती रही, और जिसने भी ज़मींदार को सच्चाई बताने की हिम्मत की उसे डरा धमकाकर या पैसे देकर चुप कर दिया गया! फिर पदमा यह ठानती है कि वह अपने पति को अच्छा कर के रहेगी, वह अपने कमरे का किवाड़ बंद कर लेती है और 5 महीने तक रघु को शिक्षा व उसका हाल सुधारती है! विक्रम एक कोठे पर नाचने वाली पर फ़िदा है! तथा अक्सर वह वहाँ पर धन उड़ाता है! रघु के ठीक हो जाने पर वह एक गरीब को पैसे दान करता है! इस पर विक्रम बिगड़कर रघु के हाथ से पैसे गिरा देता है, और रघु चुप-चाप अपने कमरे में आकर रोता है, उसके पीछे-पीछे विक्रम आता है, पदमा यह देखकर विक्रम को दो-चार सुना देती है! विक्रम ये बात अपनी माँ को बताता है, और राजेश्वरी ज़मींदार से पदमा की शिकायत करती है, ज़मींदार पदमा के पास आकर कहता है - बहु तुमसे मुझे ये उम्मीद नहीं थी, दोनों के बीच में हल्की बात-चित होती है, और ज़मींदार अपने दीवान को बुलाता है, और पदमा दीवान के सामने अपना पक्ष रखती है, और ज़मींदार को रघु के पागल होने का कारण और तमाम सचाई बताती है, और कहती है कि रघु अब पागल नही रहा, इतने में रघु कमरे में प्रवेश करता है और ज़मीदार उसके हाथ में भगवद गीता को देखता है, और बड़ा प्रसन्न होता है! और पदमा को धन्यवाद देता है! फिर वह वापस आकर राजेश्वरी को डाँटता है, और कहता है वह रघु को भी अपना ही बेटा समझे! व अगले दिन रघु को नया ज़मींदार नियुक्त करता है! विक्रम एक दिन घर आकर दिवान से पैसे की मांग करता है, दिवान उसे मना कर देता है, राजेश्वरी विक्रम को ज़मींदार बनाना चाहती है! इस बात पर विक्रम रघु के कमरे में जाकर उस पर हाथ उठाता, यह देखकर पदमा विक्रम पर छड़ी से हमला बोल देती है, और उसे मार-मार कर बरामदे में ले आती है! राजेश्वरी बीच में आकर विक्रम को बचाती है! और छत पर खड़े ज़मींदार को शिकायत करती है, और ज़मींदार पदमा का पक्ष लेता है! और विक्रम रूठ कर घर से चला जाता हैं! राजेश्वरी घर छोड़कर विक्रम के पीछे जाती है, और ज़मींदार उसे रोकने के लिए उसके पीछे जाते हैं, परन्तु दुर्भाग्यवश सीढ़ियों से गिर जाते हैं! उन्हें बहुत चोट आती है, यह देखकर राजेश्वरी वापस भागकर आती है, अब ज़मींदार बिस्तर पर पड़े हैं! और अपने अंतिम समय में रघु के नाम अपनी ज़ायदाद कर देते हैं! और रघु को गंगाजल पिलाने को कहते हैं और गंगाजल पीते-पीते उनकी मौत हो जाती है! विक्रम कोठे पर शराब व सवाब का आनंद ले रहा होता है, तभी दीवान आकर उसे ज़मींदार की मौत के बारे में बताता है, विक्रम दीवान के सामने कुछ नहीं बोलता उसे जाने के लिए कहता है! फिर फूट-फूट कर रोता है! राजेश्वरी लगातार 15 दिन ज़मींदार की तस्वीर के सामने बेसुध पड़ी रहती हैं! पदमा से रहा नही जाता तथा वह रघु से कहती है कि आप जाकर विक्रम को समझाकर कर लाओ, रघु विक्रम को लेने कोठे पर जाता है, विक्रम कहता की वह तभी घर आयेगा जब पदमा घर छोड़कर जायेगी! रघु घर आकर ये बात राजेश्वरी व पदमा को बतलाता है! ये सुनकर पदमा घर छोड़कर जाने लगती है, तभी रघु कहता वह भी उसके साथ जायेगा, दोनों घर छोड़कर खेती करने लगते हैं! अब विक्रम वापस घर आ जाता है, और राजेश्वरी विक्रम को कहती की तुम अब ज़मींदार हो! विक्रम कोठे वाली नचनियां लड़की से शादी कर लेता है! और घर जाकर राजेश्वरी से अपनी पत्नी से मुलाक़ात करवाता है, इस पर राजेश्वरी विक्रम से खफा हो जाती है! अगली अलसुबह विक्रम के सास-ससुर ढोल बजाते हैं! इस राजेश्वरी उन्हें घर से निकलने को कहती है, इस बात पर विक्रम राजेश्वरी को घर से निकाल देता है! राजेश्वरी और दाई माँ रघु के पास चली जाती है! विक्रम दीवान को बुलाता है, और दीवान को जब सारी बात मालूम होती है, तो वह दीवान के छोड़ देता! तब विक्रम अपने ससुर को नया दिवान बना देता है, और उसे लगान वसूलने के लिए भेजता है, इस बात पर गावँ वाले नये दिवान की जमकर पिटाई कर देते हैं विक्रम का ससुर घर आकर विक्रम को सारी बात बताते हैं! विक्रम क्रोध में आकर बन्दूक व चाबुक लेकर गावँ चला जाता है
और विक्रम के सास-ससुर पत्नी विक्रम को धोखा देकर उसके पैसे लेकर भागने की तैयारी में होते हैं कि विक्रम का नोकर पाँच मुस्टंडों के साथ आकर उन्हें पकड़ लेता है!इधर गावँ वाले लगान लाकर रघु को दे देते हैं! रघु लगान को स्वीकार नहीं करता, तब पदमा कहती कि आप ये पैसे लेकर विक्रम को दे आओ! रघु के जाने के बाद विक्रम आता है! और पदमा के साथ झगड़ने लगने लगता है! तभी रघु वापस आ जाता है, विक्रम चाबुक लेकर रघु पर प्रहार करता है, रघु चाबुक पकड़कर उसे विक्रम के हाथ से खींच लेता है! विक्रम अपनी बन्दूक लाकर रघु के सामने तानता है, तभी राजेश्वरी बीच में आ जाती! विक्रम राजेश्वरी को भूलवश धक्का देता है, जिससे राजेश्वरी को चोट लग जाती, और विक्रम स्तब्ध रह जाता है, उसके हाथ से बन्दूक छूट जाती है! तभी रघु विक्रम को चांटे मारता है! और राजेश्वरी विक्रम पर बंदूक तान देती हैं! पदमा विक्रम के आगे आ जाती है! और कहती है - विक्रम कैसा भी हो आखिर है तो हमारा ही! विक्रम को अंत में अपनी भूल का पश्चात्ताप होता है!
और अंत में हैप्पी एंडिंग!
 
 
यह फिल्म बहुत शानदार है! ब्लैकिन-व्हाइट इस फिल्म की पटकथा में जान है! ऊपर से पदमा के रोल में माला सिन्हा ने चार चांद लगा दिये, वही पर लीजेंड गुरू दत्त जिसका लोहा आज भी पूरी फिल्म इंडस्ट्री मानती है! तथा सुपरस्टार अमिताभ बच्चन से लेकर आमिर खान तक उनके फैन है! राजेश्वरी के किरदार में ललिता पँवार खूब जंची है! फ़िरोज़ खान का भी काम सरहानीय है! नज़ीर हुसेन ने अच्छा काम किया है! फिल्म की कहानी इन पांचों के आस-पास ही घूमती है! तथा फिल्म में अच्छा सन्देश दिया गया है! फिल्म कुल 2 गाने है, जिसे लताजी व हेमन्त कुमार ने गाया है! व [[C. Ramchandra]] ने कम्पोज़ किये, इनके बोल मश्हूर [[साहिर लुधियानवी]] ने लिखे हैं!
 
== चरित्र ==
== मुख्य कलाकार ==
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