"आरण्यक" के अवतरणों में अंतर

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=== तैत्तिरीय आरण्यक ===
दस परिच्छेदों (प्रपाठकों) में विभक्त है, जिन्हें "अरण" कहते हैं। इनमें सप्तम, अष्टम तथा नवम प्रपाठक मिलकर "तैत्तिरीय उपनिषद" कहतेकहलाते हैं। हें
 
=== बृहदारण्यक ===

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