"मनस्ताप" के अवतरणों में अंतर

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'''मनस्ताप''' या '''मनोविक्षिप्ति''' या '''साइकोसिस''' (Psychosis) मन की एक अपसामान्य दशा है जिसमें मन यह तय नहीं कर पाता कि क्या वास्तविक है और क्या अवास्तविक (आभासी)। इसके कुछ लक्षण ये हो सकते हैं- असत्य विश्वास (फाल्स बिलीफ/ भ्रमासक्ति), तथा ऐसी ध्वनि सुनाई देना या ऐसी चीजें दिखाई देना जो सामान्य लोगों को नहीं सुनाई/दिखाई देतीं। अन्य लक्षण हैं- बातचीत (भाषण) में एकरूपता न होना, किसी परिस्थिति के अनुरूप जो व्यवहार होना चाहिए उससे अलग व्यवहार। इसके अलावा नींद न आने की समस्या, समाज से दूर रहने की प्रवृत्ति, [[अभ्रिप्रेरणअभिप्रेरण]] (मोटिवेशन) की कमी, अपने दैनिक क्रियाकलापों को करने में कठिनाई आना आदि अन्य लक्षण हैं।
 
मनोविक्षिप्ति और [[पागलपन]] दोनों शब्द असाधारण मनोदशा के बोधक है, परन्तु जहाँ पागलपन एक साधारण प्रयोग का शब्द है, जिसका कानूनी उपयोग भी किया जाता है, वहाँ मनोविक्षिप्ति [[चिकित्साशास्त्र]] का शब्द है जिसका चिकित्सा में विशेष अर्थ है। पागल व्यक्ति को प्राय: अपने शरीर एवं कामों की सुध-बुध नहीं रहती। उसकी हिफाजत दूसरे लोगों को करनी पड़ती है। अतएव यदि वह कोई [[अपराध]] का काम कर डाले, तो उसे [[दंड]] का भागी नहीं माना जाता। इससे मिलता-जुलता, परंतु इससे पृथक, अर्थ मनोविक्षिप्ति का है। मनोविक्षिप्त व्यक्ति में साधारण असामान्यता से लेकर बिल्कुल पागलपन जैसे व्यवहार देखे जाते हैं। कुछ मनोविक्षिप्त व्यक्ति थोड़ी ही चिकित्सा से अच्छे हो जाते हैं। ये समाज में रहते हैं और समाज का कोई भी अहित नहीं करते। उनमें अपराध की प्रवृत्ति नहीं रहती। इसके विपरीत, कुछ मनोविक्षिप्त व्यक्तियों में प्रबल अपराध की प्रवृत्ति रहती है। वे अपने भीतरी मन में बदले की भावना रखते हैं, जिसे विक्षिप्त व्यवहारों में प्रकट करते हैं। कुछ ऐसे विक्षिप्त भी होते हैं जिनसे अच्छे और बुरे व्यवहार में अंतर समझने की क्षमता ही नहीं रहती। वे हँसते-हँसते किसी व्यक्ति का गला घोट दे सकते हैं, पर उन्हें ऐसा नहीं जान पड़ता कि उन्होंने कोई जघन्य अपराध का डाला है। इस तरह मनोविक्षिप्ति में पागलपन का समावेश होता है, परंतु सभी मनोविक्षिप्त व्यक्तियों को पागल नहीं कहा जा सकता है।

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