"क्षेमेंद्र" के अवतरणों में अंतर

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क्षेमेंद्र संस्कृत में ''परिहासकथा'' (सटायर) के धनी हैं। हम नि:संदेह कह सकते हैं कि संस्कृत में इनकी जोड़ का दूसरा सिद्धहस्त सटायर लेखक नहीं है। इनकी सिद्ध लेखनी पाठकों पर चोट करना जानती है परंतु उसकी चोट मीठी होती है परिहास कथा विषयक इनकी दो अनुपम कृतियाँ हैं ('''नर्ममाला''' तथा '''देशोपदेश''') जिनमें उस युग का वातावरण अपने पूर्ण वैभव के साथ हमारे सम्मुख प्रस्तुत होता है। ये विदग्धी के कवि होने के अतिरिक्त जनसाधारण के भी कवि हैं जिनकी रचना का उद्देश्य विशुद्ध मनोरंजन के साथ ही साथ जनता का चरित्रनिर्माण भी है। '''कलाविलास''', '''चतुर्वर्गसंग्रह''', '''चारुचर्या''', '''समयामातृका''' आदि लघु काव्य इस दिशा में इनके सफल उद्योग के समर्थ प्रमाण हैं। इनकी भाषा सरस और सुबोध है, न पांडित्य का व्यर्थ प्रदर्शन है और न शब्द का अनावश्यक चमत्कार है। भावों की उदात्त व्यंजना में तथा भाषा के सुबोध सरस विन्यास में क्षेमेंद्र सचमुच ही अपने उपनाम के सदृश व्यासदास हैं।
 
==इन्हें भी देखें==
*[[समय मातृका]]
 
==बाहरी कड़ियाँ==
*[http://www.koausa.org/Glimpses/ksemendr.html KsemendraThe Peoples' Poet] by Prof. K. N. Dhar
*[http://www.vitasta.org/1999/5a.html KSEMENDRA - A PEOPLE'S POET] - Pradeep Kaul (Khodballi)
 
[[श्रेणी:साहित्यकार]]
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