"आर्यभट" के अवतरणों में अंतर

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('''अर्थ'''-नाव में बैठा हुआ मनुष्य जब प्रवाह के साथ आगे बढ़ता है, तब वह समझता है कि अचर वृक्ष, पाषाण, पर्वत आदि पदार्थ उल्टी गति से जा रहे हैं। उसी प्रकार गतिमान पृथ्वी पर से स्थिर नक्षत्र भी उलटी गति से जाते हुए दिखाई देते हैं।)
 
== इन्हें भी देखें ==
* [[आर्यभटीय]]
* [[आर्यभट की संख्यापद्धति]]
* [[आर्यभट की ज्या सारणी]]
* [[श्रीनिवास रामानुजन्]]
* [[आर्यभट द्वितीय]]
 
== सन्दर्भ ==
| ID = ISBN 0-387-94107-X
}}
 
== इन्हें भी देखें ==
* [[आर्यभटीय]]
* [[आर्यभट की संख्यापद्धति]]
* [[आर्यभट की ज्या सारणी]]
* [[आर्यभट द्वितीय]]
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
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