"अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद": अवतरणों में अंतर

नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ
सम्पादन सारांश नहीं है
(ऑटोमेटिक वर्तनी सु, replaced: की | → की। , →)
No edit summary
| background = #FFA033
}}
[[चित्|right|350px|thumb|श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद]]
'''अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद''' (1 सितम्बर 1896 – 14 नवम्बर 1977) जिन्हें '''स्वामी श्रील भक्तिवेदांत प्रभुपाद''' के नाम से भी जाना जाता है, बीसवीं सदी के एक प्रसिद्ध [[गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय|गौडीय वैष्णव]] गुरु तथा धर्मप्रचारक थे। उन्होंने वेदान्त, [[कृष्ण]]-भक्ति और इससे संबंधित क्षेत्रों पर शुद्ध कृष्ण भक्ति के प्रवर्तक श्री ब्रह्म-मध्व-गौड़ीय संप्रदाय के पूर्वाचार्यों की टीकाओं के प्रचार प्रसार और कृष्णभावना को पश्चिमी जगत में पहुँचाने का काम किया। ये [[भक्तिसिद्धांत ठाकुर सरस्वती]] के शिष्य थे जिन्होंने इनको [[अंग्रेज़ी भाषा]] के माध्यम से [[वैदिक ज्ञान]] के प्रसार के लिए प्रेरित और उत्साहित किया। इन्होने [[इस्कॉन]] (ISKCON) की स्थापना की और कई वैष्णव धार्मिक ग्रंथों का प्रकाशन और संपादन स्वयं किया।
 
397

सम्पादन

नेविगेशन मेन्यू