"ओंकारेश्वर मन्दिर": अवतरणों में अंतर

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'''ॐकारेश्वर ''' एक [[हिन्दू]] मंदिर है। यह [[मध्य प्रदेश]] के [[खंडवा]] जिले में स्थित है। यह [[नर्मदा]] नदी के बीच मन्धाता या शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित है। यह भगवान [[शिव]] के बारह [[ज्योतिर्लिंग]]ओं में से एक है। यह यहां के मोरटक्का गांव से लगभग 12 मील (20 कि॰मी॰) दूर बसा है। यह द्वीप हिन्दू पवित्र चिन्ह '''ॐ''' के आकार में बना है। यहां दो मंदिर स्थित हैं<ref>{{cite web|url= https://www.myoksha.com/omkareshwar-temple/|title= ओम्कारेश्वर मन्दिर}}</ref>।
* ॐकारेश्वर
 
== कथा ==
राजा [https://docs.google.com/document/d/1gNm0yDgbo2AySm-xzBoeNedTpT04l0j2udPOsp2SsxU/edit?usp=sharing [मान्धाता]] ने यहाँ नर्मदा किनारे इस पर्वत पर घोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया और शिवजी के प्रकट होने पर उनसे यहीं निवास करने का वरदान माँग लिया। तभी से उक्त प्रसिद्ध तीर्थ नगरी ओंकार-मान्धाता के रूप में पुकारी जाने लगी। जिस ओंकार शब्द का उच्चारण सर्वप्रथम सृष्टिकर्ता विधाता के मुख से हुआ, वेद का पाठ इसके उच्चारण किए बिना नहीं होता है। इस ओंकार का भौतिक विग्रह ओंकार क्षेत्र है। इसमें 68 तीर्थ हैं। यहाँ 33 करोड़ देवता परिवार सहित निवास करते हैं।
 
== मान्यता ==
== मंदिर का इतिहास ==
इस मंदिर में शिव भक्त कुबेर ने तपस्या की थी तथा शिवलिंग की स्थापना की थी। जिसे शिव ने देवताओ का धनपति बनाया था I कुबेर के स्नान के लिए शिवजी ने अपनी जटा के बाल से कावेरी नदी उत्पन्न की थी I यह नदी कुबेर मंदिर के बाजू से बहकर नर्मदाजी में मिलती है, जिसे छोटी परिक्रमा में जाने वाले भक्तो ने प्रत्यक्ष प्रमाण के रूप में देखा है, यही कावेरी ओमकार पर्वत का चक्कर लगते हुए संगम पर वापस नर्मदाजी से मिलती हैं, इसे ही नर्मदा कावेरी का संगम कहते है I # धनतेरस पूजन #
इस मंदिर पर प्रतिवर्ष दिवाली की बारस की रात को ज्वार चढाने का विशेष महत्त्व है इस रात्रि को जागरण होता है तथा धनतेरस की सुबह ४ बजे से अभिषेक पूजन होता हैं इसके पश्चात् कुबेर महालक्ष्मी का महायज्ञ, हवन, (जिसमे कई जोड़े बैठते हैं, धनतेरस की सुबह कुबेर महालक्ष्मी महायज्ञ नर्मदाजी का तट और ओम्कारेश्वर जैसे स्थान पर होना विशेष फलदायी होता हैं) भंडारा होता है लक्ष्मी वृद्धि पेकेट (सिद्धि) वितरण होता है, जिसे घर पर ले जाकर दीपावली की अमावस को विधि अनुसार धन रखने की जगह पर रखना होता हैं, जिससे घर में प्रचुर धन के साथ सुख शांति आती हैं I इस अवसर पर हजारों भक्त दूर दूर से आते है व् कुबेर का भंडार प्राप्त कर प्रचुर धन के साथ सुख शांति पाते हैं I # नवनिर्मित मंदिर ##
प्राचीन मंदिर ओम्कारेश्वर बांध में जलमग्न हो जाने के कारण भक्त श्री चैतरामजी चौधरी, ग्राम - कातोरा (गुर्जर दादा) के अथक प्रयास से नवीन मंदिर का निर्माण बांध के व् ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के बीच नर्मदाजी के किनारे २००६-०७ बनाया गया हैं I
 
 
 
मन्दिर के अहाते में पञ्चमुख गणेशजी की मूर्ति है। प्रथम तल पर ओंकारेश्वर लिंग विराजमान हैं। श्रीओंकारेश्वर का लिङ्ग अनगढ़ है। यह लिङ्ग मन्दिर के ठीक शिखर के नीचे न होकर एक ओर हटकर है। लिङ्ग के चारों ओर जल भरा रहता है। मन्दिर का द्वार छोटा है। ऐसा लगता है जैसे गुफा में जा रहे हों। पास में ही पार्वतीजी की मूर्ति है। ओंकारेश्वर मन्दिर में सीढ़ियाँ चढ़कर दूसरी मंजिल पर जाने पर महाकालेश्वर लिङ्ग के दर्शन होते हैं। यह लिङ्ग शिखर के नीचे है। तीसरी मंजिल पर सिद्धनाथ लिङ्ग है। यह भी शिखर के नीचे है। चौथी मंजिल पर गुप्तेश्वर लिङ्ग है। पांचवीं मंजिल पर ध्वजेश्वर लिङ्ग है।
 
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चित्र:Omkartemple_ओंकारेश्वर_मन्दिर.jpg|मध्यप्रदेश में ओंकार मांधाता मन्दिर का बाहरी दृश्य
[[चित्र:Amleshwar_अमलेश्वर.jpg|अंगूठाकार|ओंकारेश्वर में अमलेश्वर मंदिर का बाहरी दृश्य]]
 
अमलेश्वर भी ज्योतिर्लिङ्ग है । अमलेश्वर मन्दिर अहल्याबाई का बनवाया हुआ है । गायकवाड़ राज्य की ओरसे नियत किये हुए बहुत से ब्राह्मण यहीं पार्थिव-पूजन करते रहते हैं । यात्री चाहे तो पहले अमलेश्वर का दर्शन करके तब नर्मदा पार होकर औकारेश्वर जाय; किंतु नियम पहले ओंकारेश्वर का दर्शन करके लौटते समय अमलेश्वर-दर्शन का ही है। पुराणों में अमलेश्वर नाम के बदले [विमलेश्वर उपलब्ध होता है।<ref>http://puranastudy.byethost14.com/pur_index26/pva13.htm विमलेश्वर] उपलब्ध होता है।</ref> अमलेश्वर-प्रदक्षिणा में वृद्धकालेश्वर, बाणेश्वर, मुक्तेश्वर, कर्दमेश्वर और तिलभाण्डेश्वरके मन्दिर मिलते हैं।
 
अमलेश्वरका दर्शन करके (निरंजनी अखाड़ेमें) स्वामिकार्तिक ( अघोरी नाले में ) अघेोरेश्वर गणपति, मारुति का दर्शन करते हुए नृसिंहटेकरी तथा गुप्तेश्वर होकर (ब्रह्मपुरीमें) ब्रह्मेश्वर, लक्ष्मीनारायण, काशीविश्वनाथ, शरणेश्वर, कपिलेश्वर और गङ्गेश्वरके दर्शन करके विष्णुपुरी लौटकर भगवान् विष्णु के दर्शन करे । यहीं कपिलजी, वरुण, वरुणेश्वर, नीलकण्ठेश्वर तथा कर्दमेश्वर होकर मार्कण्डेय आश्रम जाकर मार्कण्डेयशिला और मार्कण्डेयेश्वर के दर्शन करे ।
 
== यातायात ==
<!-- Omkareshwar Road is about 77 km (48 mi) from Indore on the Indore–Khandwa highway. It about 12 km (7 mi) from the Omkareshwar road station. There are steamboats across the Narmada river and also two connecting bridges. -->but no high traffic in this area . regular traffic .parking is available
 
== खंडवा से ॐकारेश्वर: 72 कि॰मी॰ ==
<!-- You can reach Omkareshwar from khandwa. It is 72km from Khandwa. There are many buses are available <br /> from khandwa(you can also go from khandwa to Sanawad and then pick bus to Omkareswar) to Omkareswar,we are having a broad gauge train form khandwa to omkareshwar road, which we have a good sight seeing -->
 
<!-- == Omkareshwar is about 77 km (48 mi) from Indore ==
Omkareshwar is 77km from Indore and can be reached by buses and private vehicles.
 
== Ujjain to Indore to Omkareswar==
 
You can reach Omkareshwar from Ujjain via Indore and then Omkareshwar. There are many '''buses and trains''' are available from Ujjain to Indore and then from Indore You have to pick up Bus for Omkareshwar.Train route is not good from Indore to Omkareshwar and there is no train route to Omkareshwar. -->
ओंकारेश्वार ज्योतिर्लिंग से संबन्धित एक अन्य कथा
 
भगवान के महान भक्त अम्बरीष और मुचुकुन्द के पिता सूर्यवंशी राजा मान्धाता ने इस स्थान पर कठोर तपस्या करके भगवान शंकर को प्रसन्न किया था। उस महान पुरुष मान्धाता के नाम पर ही इस पर्वत का नाम मान्धाता पर्वत हो गया।
 
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://sa.wikisource.org/s/fwm ओंकार क्षेत्र में कुंजल का अपने चार पुत्रों से वार्तालाप (पद्मपुराण २.८५)], संस्कृत विकिस्रोत पर।
 
== सन्दर्भ ==

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