"सदस्य:प्रियरंजन": अवतरणों में अंतर

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(शान्त योद्धा)
 
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सुमति का एक सुन्दर परिणाम,
सुगति को प्राप्त हुआ मतभेद|
द्वेष के सभी पहल को त्याग ,
प्रकट की भूतकाल पर खेद|
पुनः व्यापार हुआ प्रारम्भ ,
रहेंगे मार्ग नही एकान्त मिलकर|
अब दोनो नगरें,
करेंगे हर दिन का मधुरान्त|
मगध से बीस मील पश्चिम,
घने जंगलोॉजंगलों के अति पारअतिपार|
नगर थे दो विकसित समृद्ध,
अलग ही था उनका संसार|
प्रकृति का वह सुन्दर विस्तार,
असम्भव द्व्तीय रूप अन्यत्र|
विजय सा लहराते किसलय,
अवनी का शुभ सर्वोचित वस्त्र..... . |||| .
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