"वाप्पला पंगुन्नि मेनन": अवतरणों में अंतर

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==निजी जीवन==
[[केरल]] के मलबार इलाके में एक विद्यालय के प्रधानाचार्य के पुत्र पैदा हुए मेनोन,बचपन में अपने पढाई का बोझ घरवालों के ऊपर से उठाने के लिए घर से भाग गए।पह्ले रेलवे में कोयलाझोंक, फिर खनिक और बेंगलोर तंबाकू कंपनी में मुंशी का काम करने के बाद भारतीय प्रशासन सेवा में नीची स्तर से अपना प्रशासन सेवा में अपनी जीविका शुरू किए थे। अपने मेहनत के सहारे मेनोन ने अंग्रेज सरकार के नीचे , सबसे उच्च प्रशासन सेवक का पथ अलंकृत कर दिया। भारत के संविधान के मामले में मेनोन पंडित थे। विसरोइयों के नीचे काम करते वक्त भी मेनोन सुदृढ देशभक्त थे।
मेनोन की पत्नी श्रीमतिश्रीमती कनकम्मा थी एवं उनके दो पुत्र थे- पंगुन्नि अनंतन मेनोन और पंगुन्नि शंकरन मेनोन।
 
==बटवारा==
विसरोई की अनुपस्थिति में महाराजा ने एक २२ केलिबर की बंदूक उठाकर,मेनोन पर निशाना लगाकर बोले कि "मैं तुम्हारी आग्यापन सुनने से इनकार करता हूँ।" मेनोन ने शांत मन से राजा को समझाया कि यह कर्म करना बेवकूफी होगी और वे किसी भी हालत में अभिवृधि को रोक नहीं पाएँगे।<br />
 
बट्वारे के तुरंत पश्चात,सरहद के दोनों ओर रेफ्युजियों के आने-जाने के बीच सामाजिक द्ंगे का आगमन हुआ।यह प्ंजाब में सबसे भीषण रुपरूप मे दिख रहा था। प्ंजाब पर स्थित सुरक्ष्रा सेना बल इस समस्या को रोक नहीं पाए। कुछ ही दिनों में दंगे दिल्ली तक पहुँच गए। इस वक्त मेनोन को लगा कि मौंटबैटन जैसे व्यक्ति की अनुपस्थिति में, राजधानि की हालत और बिगड सकती है। सरदार पटेल से परामर्श करके मेनोन ने मौंटबैटन को वापस भारत बुलाने की निर्णय की।पटेल ने खुले हाथों से इस योजना को स्वीकार किय। एक आपातकालीन आयोग निर्मित किया गया जिसके अध्य्क्ष मौंटबैट्न बने, और चार महीनें और सरहद के इस और उस पार काफी सारे नुक्सान् के बाद, द्ंगे ख्त्म हो गए। विसरोई की पत्निपत्नी ने अनुतोष और क्षेम परिषद का आयोजन किया जिसकी अध्य्क्षा वे खुद बनी। मेनोन के इस द्रुत-बुद्धि के कारण ही एक हद तक दंगों पर रोक लगाया गया।
 
==भारत का एकीकरण==
स्वतंत्रता के बाद, मेनोन सरदार पटेल के अधिन,राज्य मंत्रालय के सचिव बनाए गए।पटेल के साथ मेनोन का काफी गहरा संब्ंध था। पटेल मेनोन की राजनीतिक कुशलता और कार्य-प्राप्ति पर प्रभावित थे, जिसके कारण मेनोन को वहीं प्रतिष्ठा मिली जिसकी एक प्रशासक अपने से वरिष्ट व्यक्ति से उम्मीद करता है।<br />
 
मेनोन पटेल से करीब रहकर, ५६५ राज्यों का भारत से जोडने के काम में उनका हाथ ब्ँटाया। परमसत्ता का स्थानांतरन जब विसरोई द्वारा होने को था, तब मेनोन ने पटेल को निर्देश दिया कि राजाओं को अगर प्रतिरक्षा और विदेशकार्य के साथ अगर संप्रेषन का भी भागडोर अगर भारत सरकार को मिल जाएँ, तो एकीकरन का काम आसान हो सकता है। इसमें मौंटबैटन की सहायता लेने की भी उसने सलाह दी।पटेल के नीचे सचिव होते, राज्यों के एकीकरन के वक्त देनेवालली पटेल का बयान, मेनोन ने ही तैयार किया था। अमरीका के राष्ट्रपति श्री एब्रहाम लिंकन से प्रभावित ये बयान अत्यंत रोचक है। वे अपने कूट्नीतिक कौशल का उपयोग करके, अनिच्छुक राजाओं को मनाकर राज्य मंत्राल्य के साथ अनेकों योजनाओं पर हस्ताक्षर करने में सक्षम रहें। विसरोई के नीचे काम करते वक्त भी मेनोन, राज्यों को स्वत्ंत्र स्तर देने के खिलाफ था।एसी योजना पर उन्होंने इस्तीफा देने की धमकी दी थी। विसरोई की पत्निपत्नी द्वारा मनाने पर ही मेनोन अपनी पदवी छोडे नहीं। मेनोन के कौशल पर विश्वास होने के कारण,कभी-कभी अपने निर्देशों को पार करके काम करने पर भी पटेल मेनोन के योजनओं को ठुकराते नहीं थे।<br />
 
मेनोन ने [[जूनागढ]] और [[हैदराबाद]] जैसे राज्यों का भारत से मेल वाले जोखिम् भरा काम में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई एवं नेह्रू और पटेल को कशमीर समस्या के उपरांत [[पाकिस्तान]] के साथ स्ंपर्क रख्नने की सलाह दी।मंत्रिमंडल ने कशमीर के मामले की सुझाव के लिए १९४७ में मेनोन को ही चुना था। विस्रोई मौंट्बैटन मेनोन को "नाइट की पदवी" से पुरस्कृत करना चाहते थे,पर्ंतु नए सरकार के सेवक होते हुए, इस उपाधि का स्वीकार करना, मेनोन को सही नहीं लगा।
ए बी पी न्यूज चैनल के "प्रधानम्ंत्री" नामक कार्यक्रम में अदी इरानि ने, वी पी मेनोन का किरदार निभाया था।
 
== सन्दर्भ ==
==संदर्भ==
* "V P Menon – The Forgotten Architect of Modern India". Retrieved 18 September 2014.
* India - a portrait by Patrick French - page 13

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