"पाकिस्तान की सेनेट": अवतरणों में अंतर

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सीनेट को ऐसे कई विशेष अधिकार दिये गए हैं, जो [[नैशनल असेम्ब्ली (पाकिस्तान)|नैशनल असेम्ब्ली]] के पास नहीं है। इस संसदीय बिल बनाने के रूप में एक कानून के लिए मजबूर किया जा रहा की शक्तियों को भी शामिल है। सीनेट में हर तीन साल पर सीनेट की आधे सीटों के लिए चुनाव आयोजित की जाती हैं और प्रत्येक सीनेटर छह वर्ष की अवधि के लिये चुना जाता है। संविधान में सेनेट भंग करने का कोई भी प्रावधान नहीं दिया गया है, बल्की, इसमें इसे भंग करने पर मनाही है।
 
== पृष्ठभूमि व इतिहास ==
[[पाकिस्तान की आजादी]] के बाद पाकिस्तान की पहली संविधानसभा जो कि दिसंबर 1945 में चुनी गई थी, की जिम्मेदारियों में यह बात महत्वपूर्ण था कि [[पाकिस्तान अधिराज्य|नवस्वतंत्र राज्य पाकिस्तान]] का [[संविधान]] बनाया जाए। विधानसभा ने सर्वसम्मति से 12 मार्च सन् 1949 को [[उद्देश्य संकल्प]](''क़रारदाद-ए-मक़ासद'') पारित किया, जिसके आदर्शों पर नए संविधान की स्थापना की जानी थी। इससे पहले कि यह सभा [[उद्देश्य संकल्प]] के मुताबिक नया संविधान बना पाती, अक्टूबर 1954 में इस सभा को भंग कर दिया गया। नव-गठित संविधानसभा ने मई 1955 में अपने गठन के बाद [[पाकिस्तान का संविधान, 1956|नया संविधान]] गठन किया जो 29 फरवरी 1956 को पारित किया गया और 23 मार्च 1956 को लागू कर दिया गया, इस संविधान के अनुसार देश में [[संसदीय शासन]] स्थापित किया गया। 14 अगस्त 1947 से 23 मार्च 1956 तक पाकिस्तान में [[भारतीय दंड संहिता]], [[1935]] बतौर संविधान लागू था।
1973 तक पाकिस्तान की संसद एक सदनीय थी। 1971 में [[बांग्लादेश स्वतंत्रता युद्ध]] के पश्चात जब [[पाकिस्तान]] टूट गया तब पाकिस्तानी सियासी समुदाय में इसके टूटने के कारणों में एक कारण यह भी समझा गया की सरकारें छोटे राज्यों को ध्यान नहीं देता था। अतः [[पाकिस्तान का संविधान, 1973|1973 के संविधान]] द्वारा यह उच्चसदन यानी सीनेट को स्थापित किया गया ताकि सभी छोटे राज्यों को बड़े राज्यों के तरह प्रतिनिधित्व मिल जाए। क्योंकि राष्ट्रीय विधानसभा में तो हर प्रांत से सदस्यों बहुमत के आधार पे चुने गए हैं यानी जिस प्रांत की अधिक आबादी होती है वही ज्यादा सीटें चुने गए हैं लेकिन सीनेट में सभी प्रांतों सदस्यों बराबर संख्या में चुने गए हैं।
 
7 अक्टूबर 1958 ई। को देश में सैन्य शासन लागू कर, संविधान को निलंबित कर दिया गया। सैन्य सरकार ने फरवरी 1960 को एक संवैधानिक आयोग का गठन किया जिसने [[1962 का पाकिस्तानी संविधान|1962 के संविधान]] को गठित किया। इस संविधान के तहत देश में [[अध्यक्षीय प्रणाली]](राष्ट्रपति प्रणाली) लागू किया गया। 25 मार्च 1969 को इस संविधान को भी 1970 की संवैधानिक आपदा के दौरान निलंबित कर दिया गया और आपातकाल घोशित कर दिया गया।
 
1970 में चुनी गई जन सरकार ने [[पाकिस्तान का संविधान|1973 का संविधान]] सर्वसम्मति से गठित किया और यह संविधान 14 अगस्त 1973 को लागू हुआ। इस संविधान के अनुसार देश में [[संसदीय प्रणाली]] स्थापित किया गया और शूरा के दो सदन भी गठित किए गए([[पाकिस्तान की सिनेट|सिनेट]] और [[पाकिस्तान की नैशनल असेम्बली|नैशनल असेम्बली]])।
 
1973 तक पाकिस्तान की संसद एक सदनीय थी। 1971 में [[बांग्लादेश स्वतंत्रता युद्ध]] के पश्चात जब [[पाकिस्तान]] टूट गया तब पाकिस्तानी सियासी समुदाय में इसके टूटने के कारणों में एक कारण यह भी समझा गया की सरकारें छोटे राज्यों को ध्यान नहीं देता था। अतः 1970 की अंतरिम विधानमंडल ने [[पाकिस्तान का संविधान|1973 का संविधान]] गठन किया जिसे 12 अप्रैल 1973 को पारित किया गया और 14 अगस्त 1973 को [[इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान]] में पूरी तरह से लागू कर दिया गया जिसके अनुसार पाकिस्तान में [[द्वीसदनीय प्रणाली|द्वीसदनीय]] [[संसदीय प्रणाली]] स्थापित की गई। तथा, पहली बार [[पाकिस्तान का संविधान, 1973|1973 के संविधान]] द्वारा यहएक [[उच्चसदन]], यानी सीनेट को स्थापित किया गया ताकि सभी छोटे राज्यों को बड़े राज्यों के तरह प्रतिनिधित्व मिल जाए। क्योंकि [[पाकिस्तान की राष्ट्रीय सभा|राष्ट्रीय विधानसभा]] में तो हर प्रांत से सदस्यों बहुमत के आधार पे चुने गए हैं यानी जिस प्रांत की अधिक आबादी होती है वही ज्यादा सीटें चुने गए हैं लेकिन सीनेट में सभी प्रांतों सदस्यों बराबर संख्या में चुने गए हैं। साथ ही यह भी प्रावधान है की लागू होने हेतु, किसी भी विधेयक को, [[मजलिस-ए शूरा]] के दोनों सदनों में पारित होना अनिवार्य किया गया है।
 
''आइवानी बाला'' या सीनेट के सदस्यों की संख्या शुरुआत में 45 निर्धारित की गई थी जिसे 1977 में बढ़ाकर 63, और 1977 में 87 कर दिया गया। [[परवेज मुशर्रफ|राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़]] के शासनकाल में इस सदन के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 100 कर दी गई। यह संशोधन [[कानूनी ढांचे आदेश, 2002]] द्वारा की गई थी, जो 21 अगस्त 2002 को लागू हुआ था।
 
== मुख्य उद्देश्य और संरचना ==

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