"केरल की विशिष्ट नाट्य शैली कथकली" के अवतरणों में अंतर

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आट्टक्कथाओं का मलयालम भाषा में महत्वपूर्ण योगदान राह है। उण्णयि वारियर,कार्तिका तिरुनाल,कोच्ची के वीर केरल वर्मा, आदि प्रतिभा संपन्न महान व्यक्तियों ने आट्टक्कथा साहित्य को सम्पन्न बनाया है। इनमें कोट्टक्कथा कथाओं की अहम भूमिका रही है, क्योंकि इनकी संगीतात्मकता, कवित्व आदि कोटि का है। कथकली के इन सुधारों से नैई शैलियों का भी जन्म हुआ। प्रांतीयता के आधार पर विकसित इन शैलियों के दो भेद हैं। पहला दक्षिणी शैली और दूसरा उत्तरी शैली। कोट्टारक्करा तंपुरान द्वारा किए गाया।यह प्रथम प्रयास था।
 
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