"सितार": अवतरणों में अंतर

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सितार से कुछ बडा वाद्य [[सुर-बहार]] आज भी प्रयोग में है किन्तु सितार से अधिक लोकप्रिय कोई भी वाद्य नहीं है। इसकी ध्वनि को अन्य स्वरूप के वाद्य में उतारने की कई कोशिशें की गयीं किन्तु ढांचे में निहित तन्त्री खिंचाव एवं ध्वनि परिमार्जन के कारण ठीक वैसा ही माधुर्य प्राप्त नहीं किया जा सका। गिटार की वादन शैली से सितार समान स्वर उत्पन्न करने की सम्भावना रन्जन वीणा में कही जाती है किन्तु सितार जैसे प्रहार, अन्गुली से खींची मींड की व्यवस्था न हो पाने के कारण सितार जैसी ध्वनि नहीं उत्पन्न होती।
 
==बाहरी कड़ियाँ==
== बाह्य सूत्र ==
* [http://www.omenad.net/articles/bjack_Ragrup.htm '''राग-रूपान्जलि'''] डॉ पुष्पा बसु; रत्ना प्रकाशन, कमच्छा, वाराणासी। २००७, पृ० ३३६। संलग्न: बन्दिशों की सी डी रॉम
* [http://www.omenad.net/articles/bsv_sitar1.htm '''सितार का स्वरूप'''] - ''भारतीय संगीत वाद्य'' के कुछ अंश

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