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विकास एवं उन्नति के लिये हमारा नजरिया कामयाबी की ओर ले जाने वाली सीढ़ी: ‪#‎ओमप्रकाश‬ राजभर राष्ट्
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’’अत्तदीपो भवः’’ अर्थात अपना दीपक स्वयं बनों। गरीब जाति के लोग अधिकतर गांवों में निवास करते हैं जहाॅ अनादर और गरीबी के वातावरण में घुट-घुट कर सारी जिन्दगी बिता देते हैं। कुछ लोग बड़े-बड़े पदों पर पहुॅच कर अपने जाति के लोगों से आखे फेर लेते हैं । यह बहुत ही शर्मनाक बात है ऐसे व्यक्तियों को मालूम होना चाहिये कि आप भले ही राष्ट्रपति बन जायें किन्तु आप की मर्यादा उच्च वर्ग या समाज में तब तक नहीं हो सकती जब तक कि सम्पूर्ण जाति का विकास नहीं हो जाता।
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‪#‎सम्पूर्ण‬ गरीब जाति के उत्थान के लिये एक मात्र उपाय है कि एक मजबूत संगठन और उसके उचित नेतृत्व केे साथ निःस्वार्थ भाव से तन से, मन से, धन से,बुद्विसे और विवेक से जो भी सम्भव हो अपना सहयोग व समर्थन प्रदान करें। । अपनें अपनें समाज के उत्थान के लिए हम सबका फर्ज है कि हम निम्नलिखित बातों पर खुद अमल करें और सभी भाइयों,बहनों,बच्चों को इस सच्चाई से अवगत करायें ।
 
‪#‎गुलामी‬ बुरी चीज है। गुलामी -गुलामी है ,चाहे राजनीतिक गुलामी हो, आर्थिक गुलामी हो या धार्मिक गुलामी। किसी भी प्रकार की गुलामी अपने बल और विवेक को गीरवी रख कर की जाति है।
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‪#‎शिक्षा‬ विकास की रीढ़ है, विकास का मूल मंत्र है , विकास का माप दण्ड जो व्यक्ति शिक्षित है वह सुखी है ,सम्पन्न है, विकसित है। जो मनुष्य अशिक्षित है वह दुखी है, गरीब है, हमारी जाति के पिछड़ेपन का मूल कारण अशिक्षा है। हमारे लिये अत्यन्त आवश्यक है कि हम शिक्षित हों। शिक्षा का मूल उद्देेश्य है ज्ञान और स्वावलम्बन। जो शिक्षा ज्ञान के साथ-साथ स्वावलम्बी बनाये वह तकनीकी और व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त करने पर जोर देना होगा इसे प्राप्त कर व्यक्ति स्वयं जिनें और खानें के लिये स्वतंत्र और समर्थ हो जाता है।
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‪#‎व्यवसाय‬ विकास का सबसे महत्वपूर्ण जरिया है। व्यवसाय करना अभी तक हमारे संस्कार में नहीं आ पाया । परिणामस्वरूप आमदनी के मुख्य जरिया से हम वंचित हैं। हम दिन रात मेंहनत कर मजदूरी के लिये परेशान है। किसी छोटे मोटे व्यवसाय करने के लिये सोच ही नहीं पाते । बिरला, टाटा, डालमिया पेट से ही व्यवसायी नहीं पैदा हुये थे । अपने लगन से मेहनत से, दूर दृष्टि से आज इतने बडे पैमाने पर व्यवसाय को बढ़ाकर अपने को आगे बढ़ाते हुये दूसरों के लिये रोजगार मुहैया कराया है।
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‪#‎आज‬ समाज के हर क्षेत्र में बेहद परिवर्तन हो गया है मिश्रा जी, / शर्मा जी जूते की दुकान लगाकर, ठाकुर साहब ताड़ी का ठेका लेकर खान साहब गल्ले की दुकान चलाकर सम्पत्ति अर्जित कर रहे हैं तो हमें क्यों व्यवसाय से परहेज होना चाहिये । आज होड़ सी लगी हुयी है। किसी भी शहर में कस्बे में जाये आप पायेंगें हर जाति के लोग हर तरह की व्यवसाय एवं धंन्धे से जुड़े हुये हैं। व्यवसाय ही एक ऐसा रास्ता है कि आपको अपने पैरो पर खड़ा कर ही देता है आप दूसरो के लिये रोजगार भी दे सकते हैं।
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#व्यवसाय का मतलब बहुत बड़े कल कारखानों से नहीं है बल्कि छोटे से छोटे उद्योग धंन्धो से सुख प्राप्त किया जा सकता है। अतः हम दुसरो पर आश्रित न होकर चैकीदारी - चपरासीगिरी न कर बल्कि चाय का, सब्जी का, पान का, फल का इत्यादि के कितने ही ऐसे धंन्धें हैं जो छोटी पूंजी से शुरू किया जा सकता है। इसमें शर्म की कोई बात नहीं बल्कि आत्मसम्मान एवं स्वावलम्बी बनने का पूर्ण अवसर है। समय का तकाजा है कि हम भी अपने विचारों में परिवर्तन और समय के साथ- साथ हम क्या थे?और क्या हैं?में व्यर्थ का समय न गंवाकर हमें क्या होना है उसपर विचार करें ।
<span style="font-size:80%; line-height:125%;">कॉमन्स मुक्त चित्रों एवं मीडिया का एक केन्द्रीय संग्रह है। इसपर अपलोड की गयी फ़ाइलों का प्रयोग [[:en:Wikipedia:Wikimedia Commons|विकिमीडिया की अन्य परियोजनाओं]] पर भी किया जा सकता है।</span>
‪#‎किसी‬ भी व्यवसाय के लिये पूंजी एक आवश्यक तत्व है परन्तु बहुत से ऐसे उदाहरण मिलते है । कि अत्यन्त थोड़ी सी पूंजी में छोटा सा व्यवसाय करके भी अनेकोनेक लोगों ने वेशुमार सुख सुविधा प्राप्त कर लिया है।
 
हम लोग भविष्य कि चिन्ता न कर बच्चों की जिन्दगी से खेलवाड़ करते हैं। यह सब कहां तक सही है हमें इस पर वैज्ञानिक ढंग से विचार करना होगा, अपने सोचने के ढंग में परिवर्तन लाना होगा तभी हम अपने को तथा अपने समाज को आगे बढ़ा सकते हैं। भाग्य और भगवान के भरोसे रहने पर मनुश्य निकम्मा व संस्कारहीन तथा पीछे हो जाता है। इससे हम दूर रहें तभी विकास कर सकते हैं । इसमें धन,समय तथा शक्ति तीनों का नाश होता है।
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#आज हर व्यक्ति हर पेशा करने को स्वतंत्र है । ब्राम्हण अगर बाटा के जूतों की दुकान किये हुये हैं तो चमार जाति के लोग पुरोहित हो सकते हैं , राजपूत भूमिहार जाति के लोग मूर्गि पालन कर रहे हैं तो पिछड़े जाति के लोग सेना के कर्नल, ब्रिग्रेडियर या प्रशासन में आई0ए0एस0- आई0पी0एस0 होकर बहुत बडे़ ओहदे पर जा सकता है । जरूरत है शिक्षा, योग्यता और दृढ़ संकल्प की ।
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‪#‎पोलिटिकल‬ पाॅवर इज द मास्टर की ’’राजनीति ही एक एैसी चाभी है जिससे सभी विकास के बंन्द दरवाजे खोले जा सकते हैं। राजनीति सबसे महत्वपूर्ण चीज है, राजनैतिक चेतना सबसे महत्वपूर्ण चेतना है। हम लोगों को राजनीति से रोकने के लिए हमारे ही बीच से कुछ लोगों को लालच देकर तैयार किया जाता है।उन्हीं के माध्यम से दारू,मुर्गा ,साड़ी ,कम्बल पैसा पर हमारा कीमती वोट ;जिसकी कोई कीमत नहीं लगा सकता ले लेता है। गरीबों की लड़ाई को पीछ़े करता है। अमीरों के पैसो का उपयोग कर हम लोगों को गरीब बनाता है।
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‪#‎चुनाव‬ बीतते ही आपको शराबी, बिकाऊ, पिछलग्गू कहा जाता है। नेता जीतनें के बाद पहचानता तक नहीं है। किसी पार्टी से आपका कोई भाई जीत भी गया तो पिजड़े का शेर बनकर सिर्फ सरकस दिखाता है। किसी भी पार्टी में तुम्हारा या तुमहारे चुनाव जीते भाई का वजूद शासक का नहीं ,शोशित जैसा,गुलामों जैसा है। दरी बिछानें झण्ड़ा ढोने भीड़ जुटाने व वोट दिलाने से अधिक तुम्हारी कुछ़ भी हैसियत नही है। जब तक हम सब अपने वोट की कीमत नहीं समझेगे अपने वोट को अपनी बेटी की तरह नहीं समझेगे अपने वोट की सुरक्षा नहीं करेगे ,अशिक्षा और गरीबी के कारण हमारा वोट बिकता रहेगा तो हमारा विकास नहीं हो सकता। हर युग का धर्म अलग होता है। कलयुग का धर्म राजनीति है। और सत्ता राजनीति की चाभी है।
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‪#‎हम‬ लोगो को शासन सत्ता स्वास्थ शिक्षा नौकरी आवास पेंन्शन व सरकारी जनाओ में भागीदारी मिले और, यह तभी सम्भव है। जब गरीब का बेटा विधायक ,सांसद व मंत्री बनेगा सत्ता की चाभी आपके पास होगी तब हमारा विकास होगा। आज सामाजिक व राजनैतिक दंन्श झेलने के बाद हम लोग क्यों नहीं सोचते हैं कि शासन सत्ता व राजनीति में हमारी भी गणना कब होगी।
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‪#‎प्रजातांत्रिक‬ युग में राजनीति को खोकर व्यक्ति सब कुछ खोदेगा। अतः हमें राजनीति में गांव स्तर पर, ब्लाक स्तर पर,जिले स्तर पर, प्रदेश स्तर पर या केंन्द्र स्तर पर सम्पूर्ण रूप से भाग लेनें की आवश्यकता है, आरै यह तभी सम्भव हो सकता है जब हम शिक्षित हों, समाज के प्रति जागरूक हों।
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‪#‎महिला‬ संगठन ,युवा संगठन और छात्र संगठन समाज की प्रगति उनके महिला संगठ़न और शिक्षा से लगाया जा सकता है जिस समाज में जितने प्रतिशत महिलाएं शिक्षित होंगी उतनें ही प्रतिशत उस समाज का सही माने में प्रगति होगा। हमारे समाज को सुदृढ़ बनाने के लिये तीनों को शिक्षा का एवं संगठ़न का होना अति आवश्यक है। अगर ये तीनों का दृष्टिकोण जिस दिन एक हो जायेगा समाज की प्रगति में उस दिन से किसी प्रकार का अवरूध्द नहीं हो सकता । समाज दिन दुना रात चैगुना उन्नति कर सकता है । अतः हमें महिलाओं की शिक्षा एवं उनके संगठन में योगदान, युवा शक्ति का योगदान एवं छात्रों का योगदान बहुत ही आवश्यक है। हमारे समाज का हर एक शिक्षित व्यक्ति यह संकल्प करें कि वह समाज के हर व्यक्ति को शिक्षित करेगा ,तो हमारी शिक्षा की कमी भी पूरी हो सकेगी तथा हम संगठित भी हो सकते हैं। क्योंकि अशिक्षा ही समाज में एक बहुत बड़ी कमजोरी है, जिसके कारण हम गरीब लोग हीन भावना से देखे जाते हैं ।
#किसी परिवार,समाज या राष्ट्र के समुचित विकास के लिये संगठन, एकता की अत्यंत आवश्यकता होती है। संगठन प्रगति का प्रतीक और सुगम पथ है। हमारे समाज में ऐसा कोइ भी ऐसा संगठन नहीं बन पाया जो कि अपनें समाज को पूर्ण रूप से संगठित कर सके,तथा विकास का पथ प्रदर्शन कर सके। आपसी मतभेद बना रहता है। हर कोई एक दूसरे को अपनें से हीन तथा अपनें को श्रेश्ठ समझ रहा है।
‪#‎इसी‬ सोच के कारण हमारी आज ऐसी दशा है। मजबूत संगठन के कारण ही हमसे भी पिछड़े लोग आज अग्रसर हो गये,और अपनें आप को उच्च श्रेणी में गिननें लगे है। और आज हम दिन प्रतिदिन पिछे ही होते जा रहे हैं। गरीब जब तक संगठित नहीं होंगे उनकी उन्नति नहीं हों सकती एक मजबूत संगठन की आवश्यकता है। सभी भाइयों से निवेदन है कि जो जहाॅ भी है तन से,मन से,धन से संगठन को मजबूत बनानें में अपना पूर्ण सहयोग देकर सदियों से गरीब शोशित पिछड़े समाज के उत्थान के लिये कुछ कर देनें का दृढ़ संकल्प करें। असंगठित रहकर आपनें बहुत खोया अब और अधिक न खोयें।
‪#‎यह‬ स्पष्ट है कि हम सभी की जाति एक है और वह है इन्सान का होना और धर्म भी सबका एक है इन्सानियत का होना । परन्तु ऐतिहासिक उथल पुथल और अपनी अज्ञानता के कारण हम एक दूसरे से अलग होते चले गये। हमें अपनें इतिहास का सही अध्यन करना आवश्यक है,तभी हम सब में जागृति आयेगी। यदि हमें अपना खोया हुआ गौरव फिर से प्राप्त करना है तो हमें अपनें पैरों पर खड़ा होना ही होगा। खोये हुए अधिकार कभी भी भीख मांग कर अथवा अधिकारों का हनन करनें वाले से प्रार्थना करके प्राप्त नहीं किया जा सकता है, किन्तु उसके लिये हमें निरन्तर संघर्ष करना होगा। स्वाभिमान खोकर जीवन व्यतीत करना लज्जास्पद बात है। स्वाभिमान जीवन में एक बहुत ही प्राणभूत शक्ति है, उसके बिना मनुष्य मात्र दीन-हीन बन कर रह जाता है । कठिन तपस्या तथा निरंन्तर संघर्ष से ही मनुष्य को शक्ति आत्म विश्वास तथा सम्मान प्राप्त हो सकता है।
‪#‎मेरा‬ भारत महान है। परन्तु यह भी निर्विवाद सत्य है कि यहां अन्न उपजाने वाला अन्न के लिये मरता है, कुआॅ खोदने वाला प्यासा मरता है, कपड़ा बुनने वाला नंगा रहकर गर्मी,धूप,सर्दी और उपहास सहता है,महल अटारी उठाने वाले फुटपात पर रहते हैं,आजीवन सबका आदर सत्कार करने वाला मार,धक्का,और अपमान पाता है। अतःगरीबी और शोषण से बचने का मात्र एक ही रास्ता है शिक्षा,संगठन,और संघर्ष। हमारा समाज जिस दिन इन तीनों तत्वों को अपना लेगा हमारा कल्याण सुनिश्चित हो जायेगा।
‪#‎गरीब‬ जाति की सारी शक्ति छिन्न -भिन्न पड़ी हुयी है । जागरण के बेला में भी हम सो रहे हैं अलग-अलग टुकड़ों में बॅंटकर स्वयं अपने ही पाॅंव में कुल्हाड़ी मार रहे है। ऐसे हालत में आपसी फूट और मतभेद का रहना संम्पूर्ण गरीब जाति के लिये घातक है ।
‪#‎हमारे‬ पूर्वंजो का इतिहास हमारी बहुत बड़ी शक्ति तथा एक पथ प्रदर्शक है।
उत्थान के लिये संघर्ष में इसके द्वारा हमें प्रेरणा प्राप्त होती है। कुरीतियों, अंन्धविश्वासों आदि को दूर कर आर्थिक एवं सामाजिक न्याय प्राप्त करने के लिए समयानुकूल परिवर्तन लाना हमारे लिए आज एक चुनौती है । जाति-पाति तथा अपने आप को सर्वश्रेष्ठ साबित करने के चक्कर में व्यर्थ का समय नष्ट करना समझदारी नहीं बल्कि महामुर्खता है। अतः संधे शक्ति कलयुगे, एक जुट होकर समाजिक अपमान और अवहेलना के विरूद्ध जबरदस्त संघर्ष छेड़ना होगा ।
वोट हमारा - राज दूसरो का कब तक चलायेगे क्या हम हक अधिकार सम्मान,स्वाभिमान के लिए संघर्ष नहीं कर सकते?
आओ हम सब मिलकर अपनी बिगड़ी खुद बनावें अपने पैरों चलकर अपना विकास करें दूसरे के भरोसे हमारा विकास नहीं हो सकता है। आओ हम सब मिलकर अपनी लड़ाई को खुद लड़ें।
समाज के हर भाई बहनों से अनुरोध है कि यदि इस अपील मे कोई त्रुटि हो तो उस पर न जाकर लेखक की भावना - अपील के उद्देश्य की ओर ध्यान दें ताकि आप का विकास हो सके।
हमारा संकल्प - आपका विकास
ओमप्रकाश राजभर राष्ट्रीय अध्यक्ष सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी
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