"तिरुवल्लुवर" के अवतरणों में अंतर

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''तिरुवल्लुवर'' (तिरु वल्लुवर) नाम ''तिरु'' (एक तमिल शब्द जिसका अर्थ ''माननीय'' होता है, जो ''श्री'' के समान है)<ref>काल्डवेल, रॉबर्ट. 1875. द्रविड़ या दक्षिण भारतीय परिवार के भाषाओं का एक तुलनात्मक व्याकरण. लंदन: Trübner.</ref> और ''वल्लुवर'' (तमिल परंपरा के अनुसार ''वल्लुवन'' के लिए एक विनम्र नाम) '''से बना''' है। उनके वास्तविक नाम के बजाए वल्लुवन नाम एक सामान्य नाम है जो उनकी जाति / व्यवसाय का प्रतिनिधित्व करता है। बहरहाल, थीरूकुरल (वल्लुवन) के लेखक का नाम उनके समुदाय पर रखा गया है या उसके विपरीत, यह सवाल आज तक अनुत्तरित बना हुआ है।
 
तिरुवल्लुवर के जन्म के बारे में कुछ किंवदंतियां रही हैं। शैव, वैष्णव, जैन, [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] सम्प्रदायों का तर्क है कि तिरुवल्लुवर उनसे संबंधित हैं। तिरुवल्लुवर के जन्म के बारे में कुछ किंवदंती भी रही हैं जिसमें उन्हें एक जैन समानार संत या एक हिंदू कहा गया है। लेकिन उनके धर्म के बारे में कोई सबूत उपलब्ध नहीं है| कमात्ची श्रीनिवासन "कुरल कुराम समयम", तिरुक्कुरल प्रकाशन, मदुरै कामराज विश्वविद्यालय, 1979 | इस कृति का आरम्भ सर्वशक्तिमान भगवान को सादर प्रणाम करते हुए एक अध्याय से होता है। इसीलिए कहा जा सकता है कि तिरुवल्लुवर आस्तिक थे। लेकिन उनके परमेश्वर सर्वशक्तिमान हैं, सारे संसार के निर्माता हैं और जो अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। दरअसल कुरल किसी भी विशिष्ट या सांप्रदायिक धार्मिक आस्था की वकालत नहीं करता है। एक कथा में उन्हें पंड्या शासकों की प्राचीन राजधानी मदुरै से जोड़ा जाता है, जिन्होंने [[तमिल साहित्य]] को सख्ती से बढ़ावा किया था। एक अन्य के अनुसार उनका जन्म और लालन-पालन [[मयलापुर|मायलापुर]] में हुआ था जो वर्तमान में मद्रास शहर का एक हिस्सा है और उन्होंने अपनी कृति ''थिरुकुरल[[तिरुक्कुरल]]'' को जमा करने के लिए मदुरै की यात्रा की ताकि वे राजा (पंडियन) और उनके कवियों के समूह से अनुमोदन प्राप्त कर सकें. उनकी पत्नी का नाम वासुकी है<ref>{{cite book
| last =Kanakasabhai
| title =The Tamils Eighteen Hundred Years Ago
 
== तिरुक्कुरल ==
[[चित्र:Tiruvalluvar statue LIC.jpg|thumb|right|350 px|कन्याकुमारी में तिरुवल्लुवर प्रतिमा]]
{{Main|तिरुक्कुरल}}
 
तिरुक्कुरल तमिल की एक सबसे श्रद्धेय प्राचीन कृति है<ref>[http://www.tamilinfoservice.com/exclusive/art/2005/apr1.htm तमिल नाडु 'तिरुक्कुरल' के लिए राष्ट्रीय मान्यता चाहता है]</ref> . कुरल को 'दुनिया का आम विश्वास'{{Citation needed|date=November 2009}} माना जाता है, क्योंकि यह मानव नैतिकता और जीवन में बेहतरी का रास्ता दिखलाता है। संभवतः बाइबल, कुरान और गीता के बाद कुरल का सबसे अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया है। {{Citation needed|date=November 2009}}.
1730 में तिरुक्कुरल का लैटिन अनुवाद कोस्टांज़ो बेस्ची द्वारा किया गया जिससे यूरोपीय बुद्धिजीवियों को उल्लेखनीय रूप से तमिल साहित्य के सौंदर्य और समृद्धि को जानने में मदद मिली.
 
===ऋषभदेव===
तिरुक्कुरल का प्रथम अध्याय ईश्वर-स्तुति पर है, जिसमे [[जैन धर्म]] के प्रथम [[तीर्थंकर]] [[ऋषभदेव]] की स्तुति की गयी है|
 
==मूर्ति==
[[चित्र:Tiruvalluvar statue LIC.jpg|thumb|right|350 px|कन्याकुमारी में तिरुवल्लुवर प्रतिमा]]
भारतीय उपमहाद्वीप (कन्याकुमारी) के दक्षिणी सिरे पर संत तिरुवल्लुवर की 133 फुट लंबी प्रतिमा बनाई गई है जहां अरब सागर, [[बंगाल की खाड़ी]] और हिंद महासागर मिलते हैं।
133 फुट, तिरुक्कुरल के 133 अध्यायों या ''अथियाकरम'' का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी तीन अंगुलिया ''अरम'', ''पोरूल'' और ''इनबम'' नामक तीन विषय अर्थात नैतिकता, धन और प्रेम के अर्थ को इंगित करती हैं।

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