"कोथ": अवतरणों में अंतर

नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ
5 बाइट्स जोड़े गए ,  8 वर्ष पहले
छो
बॉट: छोटे कोष्ठक () की लेख में स्थिति ठीक की।
छो (पूर्णविराम (।) से पूर्व के खाली स्थान को हटाया।)
छो (बॉट: छोटे कोष्ठक () की लेख में स्थिति ठीक की।)
यह व्याधि अधिक्तर पुरुषो मे पायी जाती ह। धुम्रपान से,अधिक उम्र मे calcium के जमा होने से तथा ह्र्द्यान्त्रावरण शोफ् से उत्पन्न अन्तः शल्यता आदि कारणॉ से धमनियो मे शोफ तथा एन्ठन उत्पन्न हो जाती ह्। इससे धमनियो मे सन्कोच होकर धमनियो का विवर कम हो जाता ह। इस रोग से प्रभवित स्थान पर रक्त कि न्युनता होकर कोथ उत्पन्न होती ह्।
 
(ख) ''' रेनाड का रोग''' ( raynaud's disease)
 
यह व्याधि प्रायः स्त्रियो मे होती है। शाखाओ कि धमनिया शीत के प्रति सूक्ष्म ग्राही होने पर धमनियो मे एन्ठन तथा सन्कोच उत्पन्न हो जाता ह। इससे रक्त प्रवाह मन्द पड जाता ह तथा रक्त्त वाहिका के अन्तिम पूर्ति प्रान्त मे रक्त न्युन्ता होकर कोथ उत्पन्न हो जाती है।
१) कोथ से प्रभावित अग के क्रियाशिल होने पर, उक्तियो मे oxygen कि न्युन्ता हो जाती ह, इससे पेशियो मे एन्ठन आती ह तथा तीव्र वेदना होने लगती ह्।
 
२) रक्त सन्चार मे मन्द्ता आ जाने से प्रभावित अग मे विश्राम काल भि वेदना रेहती ह।
 
३) सन्क्रमण जन्य कोथ मे विषाक्त्तता होने से ज्वर्, वमन तथा रक्त भार मे ह्रास इत्यादि।
 
;स्थानिक
१) प्रभावित अग मे विवर्णता
 
२) धमनियो मे स्पन्दन स्माप्त हो जाता ह तथ कोशिकाओ मे रक्त कि अनउपस्थिति हो जाने से त्वचा के रग मे कोइ प‍‍रिवर्तन नही आता।
 
३) प्रभावित अग मे उष्मा का अभाव
 
४) प्रभावित अग मे क्रिया का अभाव
 
== चिकित्सा ==

नेविगेशन मेन्यू