"लोक सेवा गारंटी अधिनियम २०१० (म प्र)" के अवतरणों में अंतर

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म.प्र. लोक सेवाओं की गारंटी विधेयक 2010 एक ऐतिहासिक कदम है। नागरिक प्रशासन में नागरिकों की भागीदारी, उनके अधिकारों के संरक्षण का अभूतपूर्व प्रयास है। यह कानून लाल फीताशाही (रेड टेपिज्म) पर नियंत्रण का एक सश्क्त माध्यम बनेगा। इस विधेयक का सभी वर्गों और सभी दलों ने स्वागत किया है।
 
अब चिन्हित सेवाओं को प्राप्त करने के लिए आमजन को किसी की इज्छा पर निर्भर नहीं रहना होगा ।होगा। सेवायें प्राप्त करना अब अधिकार होगा ।होगा। उन्होंने कहा लोक सेवा प्रदान करने में लापरवाही या कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर अर्थदण्ड आरोपित करने का प्रावधान भी इस अधिनियम में किया गया है ।है। प्रत्येक चिन्हित सेवाओं को प्रदान करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। प्रथम चरण में ९ विभागों की २६ सेवाओं को इस अधिनियम के दायरे में रखा गया है ।है। तय समय-सीमा में पदाभिहित अधिकारी को यह सेवा प्रदान करनी होगी ।होगी। समय-सीमा में काम नहीं करने पर दोषी अधिकारी-कर्मचारी पर २५० रूपये से लेकर ५ हजार रूपये तक के दण्ड की व्यवस्था की गई है ।है।
 
== शामिल विभाग ==

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