"जुलियस सीसर" के अवतरणों में अंतर

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तानाशाह का रूप धारण करना ही सीज़र की मृत्यु का कारण हुआ। एकच्छत्र राज्य की घोषणा का अर्थ गणतंत्र का अंत था और गणतंत्र के अंत होने का अर्थ रिपब्लिकन संभ्रांत समुदाय के आधिपत्य का अंत। इसीलिए उन लोगों ने षड्यंत्र रचना आरंभ कर दिया। षड्यंत्रकारियों का नेता मार्कस बूट्स बना जो अपनी नि:स्वार्थ देशभक्ति के लिए प्रसिद्ध था। परंतु इसके अनुयायी अधिकांशत: व्यक्तिगत ईर्ष्या तथा द्वेष से प्रेरित थे। १५ मार्च, ४४ ई. पू. को जब सीनेट की बैठक चल रही थी तब ये लोग सीज़र पर टूट पड़े और उसका वध कर दिया। इस मास का यह दिन उसके लिए अशुभ होगा, इसकी चेतावनी उसे दे दी गई थी।'
 
== मंचन ==
- शेक्सपीयर के जूलियस सीज़र का [[अरविन्द गौड़]] के निर्देशन मे मंचन ,काव्यानुवाद- [[अरविन्द कुमार]] ,[[अस्मिता]] नाट्य संस्था ने अब तक जुलियस सीसर के कुल ४० प्रदर्शन किये है। [[अरविन्द कुमार]] के काव्यानुवाद [[शेक्सपीयर]] के जूलियस सीजर का मंचन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के लिये इब्राहिम अल्काजी के निर्देशन में भी हुआ । 1998 मे जूलियस सीज़र का मंचन अरविन्द गौड़ के निर्देशन मे शेक्सपियर नाटक महोत्सव (असम) और पृथ्वी थिएटर महोत्सव, भारत पर्यावास केन्द्र (इंडिया हैबिटेट सेंटर ), में [[अस्मिता]] नाट्य संस्था ने दोबारा किया । अरविंद कुमार ने सिंधु घाटी सभ्यता की पृष्ठभूमि में इसी नाटक का काव्य रूपान्तर भी किया है, जिसका नाम है - विक्रम सैंधव।
 
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