"आहारीय लौह" के अवतरणों में अंतर

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जन्म के समय नवजात के पास केवल चार महीने की लोहे की आपूर्ति होती है। इतने समय में उस शरीर को अपने आहार से लौह तत्त्व को अपने आहार से ग्रहण करना प्रारम्भ कर देना आवश्यक होता है। लौह की थोडी सी कमी भी इसके बौद्धिक विकास को कम कर सकती है। रजः स्राव और गर्भावस्था के समय महिलाओं में लौह की कमी हो सकती है। कठोर व्यायाम से भी शरीर में इसकी कमी हो सकती है। मघपान करने वालों में कुछ आहार शरीर द्वारा अन्य आहारों से प्राप्त लोहे का उपयोग रोक देते है। लोहे की कमी शवासहीनता, थकावट और कमजोरी उत्पन्न कर सकती है। इसकी अधिकता विषाक्तता उत्पन्न कर सकती है।
 
== स्रोत ==
आहारीय लौह के महत्वपूर्ण स्रोत हैं: हरी पत्तेदार [[सब्जी|सब्जियां]] , [[मटर]] फ़लियां ,[[किशमिश]] , [[अखरोट]] , [[नाशपाती]], सभी [[अनाज]] , [[मूंग]] ,[[मसूर]] दाल, [[चोकर]] , बीज ,[[सोयाबीन]] , [[मछली]] , [[यकृत]], [[मुर्गा]], और अंडा, इत्यादि।
 
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