"बर्बर भाषाएँ" के अवतरणों में अंतर

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==लिपि==
बर्बरी की अपनी "तिफ़िनग़" नाम की प्राचीन अक्षरमाला है जिसकी सबसे पुरानी लिखाई २०० ई॰पू॰ से मिली है। बर्बर इलाक़ों पर अरबी आक्रमण और क़ब्ज़े के बाद इसका प्रयोग लगभग ख़त्म हो गया हालांकि गहरे रेगिस्तान में रहने वाले तुआरग-भाषियों में इसका इस्तेमाल जारी रहा। बहुत से बर्बर लोग बर्बरी छोड़कर अरबी बोलने लगे और जो बर्बरी लिखते-बोलते भी थे उनमें अरबी वर्णमाला का इस्तेमाल आम हो गया। तुआरग इलाक़ों के अलावा अन्य बर्बर क्षेत्रों में अरबी वर्णों का यह प्रयोग 1000 ई॰ से 1500 ई॰ तक प्रचलित रहा। 19वी और 20वी सदी में यूरोपियाई सामवाद के साथ​-साथ बर्बरी का [[रोमन लिपि]] में लिखना शुरु हो गया। इस "बर्बर लैटिन वर्णमाला" (यानि रोमन लिपि का बर्बर के लिए प्रयोग) का इस्तेमाल [[मोरक्को]] और [[अल्जीरिया]] में बहुत होने लगा, विशेषकर कबाइली बर्बर लिखने के लिए। 2003 में मोरक्को ने, बर्बर स्वाभिमान को ध्यान में रखते हुए, औपचारिक रूप से तिफ़िनग़ लिपि के एक आधुनिक रूप को सरकारी मान्यता दे दी लेकिन अभी भी कबाइली बर्बर लेखक बर्बर लैटिन लिपि का ही ज़्यादा प्रयोग करते हैं। इसके विपरीत, तुआरग आबादियों वाले [[माली]] और [[नाइजर]] ने बर्बर लैटिन लिपि को मान्यता दे दी है हालांकि वहाँ तिफ़िनग़ अधिक प्रचलित है।
 
==व्याकरण==

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