विशिष्टीकरण (कार्यपरक)

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कार्य की दृष्टि से विशिष्टीकरण का अर्थ है, किसी तंत्र या प्रणाली में विभिन्न प्रकार के कार्यों की पहचान करना और उसके आधार पर कार्य को विभाजित करना।

बहुकोशीय जन्तुओं में, भिन्न-भिन्न कार्यों के किये अलग प्रकार की कोशिकाएँ होतीं हैं। जैसे, अस्थि निर्माण के लिये अलग कोशिकाएँ होतीं है जबकि आक्सीजन लाने-लेजाने के लिये अलग कोशिकाएँ।

पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में, कुछ श्रमिक भवन निर्माण में दक्ष होते हैं तो कुछ वेल्डिंग करने में। कोई कृषि-कार्य में दक्ष होता है कोई चिकित्सीय कार्य में। इस प्रकार का विशिष्टीकरण केवल लाभकर ही नहीं है बल्कि परमावश्यक है। इससे वे कार्य भी हो पाते हैं जो अन्यथा असम्भव समझे जाते हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]