विलासिता की वस्तुएँ

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अर्थशास्त्र की दृष्टि से विलासिता की वस्तुएँ उन वस्तुओं को कहा जात है जिनकी माँग बढ़ती आय के साथ बढ़ती है। यह माँग अत्यावश्यक वस्तुओं के बिल्कुल ही विपरीत है। [1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Varian, Hal (1992). "Choice". Microeconomic Analysis (Third सं॰). New York: W.W. Norton. पृ॰ 116–143 [p. 117]. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-393-95735-7. https://books.google.com/books?id=m20iQAAACAAJ&pg=PA117. "[...] as the consumer gets more income, he consumes more of both goods but proportionally more of one good (the luxury good) than of the other (the necessary good)."