विभूतिभूषण दत्त

विभूतिभूषण दत्त (बंगला : বিভূতিভূষণ দত্ত ; 1888 - 1958) भारत के एक गणितज्ञ थे जिन्होंने भारतीय गणित के इतिहास में अमूल्य योगदान दिया है।
जीवनी
[संपादित करें]विभूतिभूषण दत्त अविभाजित भारत के चट्टग्राम जिला के कानुनगोपाड़ा में एक एक निर्धन बंगाली परिवार में जन्मे थे। वे गणेश प्रसाद के छात्र थे। उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। १९१४ ई० में उन्होंने वहीं से गणित में स्नातकोत्तर डिग्री एवं १९२० में वहीं से अनुप्रयुक्त गणित में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। वे कलकाता विश्वविद्यालय में अध्यापन करने लगे जहाँ उन्होंने युनिवर्सिटी साइंस कालेज में व्याख्याता एवं १९२४ से १९२९ तक अनुप्रयुक्त गणित में रासविहारी घोष प्रोफेसर रहे। १९२० एवं १९३० के दशक में उन्होंने भारतीय गणित के इतिहास के एक विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने ख्याति अर्जित कर ली थी। वे भारतीय दर्शन एवं धर्म में भी गहरी पैठ रखते थे। १९२९ में वे अध्यापन से सेवानिवृत हो गये और १९३३ में विश्वविद्यालय छोड़ दिया। वे १९३८ मे "स्वामी विद्यारण्य" नाम से दीक्षा ग्रहण करके संन्यासी जीवन आरम्भ कर दिया। इसके बाद शेष जीवन उन्होंने संन्यासी के रूप में ही राजस्थान के पुष्कर में बिताया।
रचनाएँ
[संपादित करें]अवधेश नारायण सिंह (१९०१-१९५४) के साथ मिलकर उन्होंने हिस्ट्री ऑफ मैथेमटिक्स : अ सोर्स बुक (History of Hindu Mathematics : A Source Book) नामक पुस्तक की रचना की जो भारतीय गणित के इतिहास पर एक मानक ग्रन्थ है। उन्होंने शुल्व सूत्र पर एक मोनोग्राफ भी लिखा। उन्होंने ७० से अधिक शोधपत्र लिखे जो अधिकांशतः भारतीय गणित के इतिहास से सम्बन्धित थे।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]बाहरी कड़ियाँ
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