विद्यासागर (जैन संत)

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आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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आचार्य विद्यासागर
नाम (आधिकारिक) आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
व्यक्तिगत जानकारी
जन्म नाम विद्याधर
जन्म 10 अक्टूबर 1946
सदलगा
माता-पिता मल्लप्पा
शुरूआत
सर्जक आचार्य ज्ञानसागर
दीक्षा के बाद
पूर्ववर्ती आचार्य ज्ञानसागर

आचार्य विद्यासागर (कन्नड़:ಆಚಾರ್ಯ ವಿದ್ಯಾಸಾಗರ್) एक प्रख्यात दिगम्बर जैन आचार्य हैं।[1] उन्हें उनकी विद्वाता और तप के लिए जाना जाता है।[2]

जीवनी[संपादित करें]

उनका जन्म १० अक्टूबर १९४६ को विद्याधर के रूप में कर्नाटक के बेलगाँव जिले के सदलगा में शरद पूर्णिमा के दिन हुआ। उनके पिता श्री मल्लप्पा थे जो बाद में मुनि मल्लिसागर बने। उनकी माता श्रीमती थी जो बाद में आर्यिका समयामती बनी।

उन्हें २२ वर्ष की आयु में आचार्य ज्ञानसागर ने संत बनाया, जो १९६८ में अजमेर के आचार्य शांतिसागर के वंश के थे। उन्हें १९७२ में आचार्य के रूप में प्रतिष्ठित किया गया।[2]

आचार्य विद्यासागर संस्कृत, प्राकृत सहित विभिन्न आधुनिक भाषाओं हिन्दी, मराठी और कन्नड़ में विशेषज्ञ स्तर का ज्ञान रखते हैं। उन्होंने हिन्दी और संस्कृत के विशाल मात्रा में रचनाएँ की हैं। विभिन्न शोधार्थियों ने उनके कार्य का मास्टर्स और डॉक्ट्रेट के लिए अध्ययन किया है।[3] उनके कार्य में निरंजना शतक, भावना शतक, परीषह जाया शतक, सुनीति शतक और शरमाना शतक शामिल हैं। उन्होंने काव्य मूक माटी की भी रचना की है।[2][3] विभिन्न संस्थानों में यह स्नातकोत्तर के हिन्दी पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है।[4] आचार्य विद्यासागर कई धार्मिक कार्यों में प्रेरणास्रोत रहे हैं।[5][6]

उनकी पद्धति[संपादित करें]

2001 के आँकड़ों के अनुसार उनके लगभग 21% दिगम्बर साधु आचार्य विद्यासागर के आज्ञा से चर्या करते हैं।[7][8]

टिप्पणी[संपादित करें]

  1. Flügel 2006, पृष्ठ 353
  2. शाह 1998, पृष्ठ 56–57
  3. "Acharya Vidyasagar's book "Silent Earth" presented to President". न्यूज़ वेब इण्डिया 123 डॉट कॉम. http://news.webindia123.com/news/articles/India/20110615/1772295.html. अभिगमन तिथि: 2013-11-14. 
  4. http://www.bhaskar.com/article/MPc-58-1943771-NOR.html
  5. Studies in Jaina History and Culture: Disputes and Dialogues - Google Books. Books.google.com. http://books.google.com/books?id=cAoLg0R1jZIC&pg=PA356&dq=jain+vidya+sagar&hl=en&sa=X&ei=DwbIUOWKJ4rk8gSvuYGQBg&ved=0CDAQ6AEwAA#v=onepage&q=jain%20vidya%20sagar&f=false. अभिगमन तिथि: 2012-12-12. 
  6. "Religious intolerance, terror attacks threat for country: Acharya - Oneindia News". News.oneindia.in. 2008-10-05. http://news.oneindia.in/2008/10/05/religious-intolerance-terror-attacks-threat-for-country-acharya-1223211796.html. अभिगमन तिथि: 2012-12-12. 
  7. Flügel 2006, पृष्ठ 356
  8. "Jain Muni Pramansagar ji Maharaj disciple of Acharya Vidyasagar ji Maharaj. - द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया". Timesofindia.indiatimes.com. 2010-10-27. http://timesofindia.indiatimes.com/home/Jain-Muni-Pramansagar-ji-Maharaj-disciple-of-Acharya-Vidyasagar-ji-Maharaj-would-discourse-on-Ramayana-and-Geeta-at-the-local-Zila-school-ground-from-नवम्बर-7-to-11-The-four-day-programme-being-organised-by-Vishwa-Dharma-Jagaran-Manch-is-expected-to-garner-huge-crowd-in-wake-of-the-popularity-that-Maharaj-has-gained-while-giving-similar-discourse-in-other-cities-of-the-country-/articleshow/6823669.cms. अभिगमन तिथि: 2012-12-12. 

सन्दर्भ[संपादित करें]

अन्य पठनीय सामग्री[संपादित करें]

  • विद्यासागर, आचार्य, मूक माटी, भारतीय ज्ञानपीठ, ISBN 978-81-263-1436-2 
  • विद्यासागर, अचार्य (2010), Lal Chandra Jain, ed., The Silent Earth [Mūkamāṭī], Moortidevi Granthamala: English Series No. 22, नई दिल्ली: भारतीय ज्ञानपीठ, ISBN 978-81-263-1875-9 
  • माकेव, प्रभाकर; राममुर्ति, त्रिपाठी, मुकमाटी मिमांसा, 1, 2 & 3, भारतीय ज्ञानपीठ 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]