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विक्रान्तवर्मन तृतीय

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विक्रान्तवर्मन तृतीय चम्पा के राजा थे जिनका शासनकाल सन् 817 से 854 तक रहा।

विक्रान्तवर्मन राजा हरिवर्मन प्रथम (शासनकाल 802–817) के पुत्र थे।[1] सन् 813 में उन्हें उनके पिता ने पांडुरंग रियासत (फ़न रन) का शासक (अधिपति) नियुक्त किया और सन् 817 में वो चम्पा के राजा बन गये।[2] उन्होंने पो नागार मंदिर में विक्रांतरुद्रेश्वर और विक्रांदेवाधिभद्रेश्वर के नाम से पूजे जाने वाले शिव के मंदिर के लिए अनुष्ठान किए और उपहार (चावल के खेत) भेंट किए, राजा के पूर्वजों की प्रशंसा की। उनके शिलालेख आम तौर पर बहुत छोटे हैं। उनके बारे में और कुछ नहीं पता है।[3]

निन्ह थुएन के बाकुल में सन् 829 ई॰के एक शिलालेख में शिव और बुद्ध की पूजा के लिए बनाएयेगएयेमंदिरों का उल्लेख है,क्योंकि वे स्थानीय मान्यताओं का आधार बने।

अचानक सन् 854 से सभी दक्षिणी शिलालेख अज्ञात कारणों से गायब हो गए थे।[4] सन् 854 और सन् 875 के बीच 20 वर्ष का अंतराल था। सन् 875 तक, नए बौद्ध शासक के अधीन थू बॉन नदी घाटी में जानकारी फिर से सामने आई, जिसका व्यक्तिगत नाम लक्ष्मीन्द्र भूमिश्वर ग्रामस्वामी था।[5]

सन्दर्भ

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  1. Lafont 2007, p. 147.
  2. Vickery, Michael Theodore (2005). Champa revised. Asia Research Institute, Singapore.
  3. Coedès 1975, p. 104.
  4. Lafont 2007, p. 148.
  5. Lafont 2007, p. 150.
  • Coedès, George (1975), Vella, Walter F. (ed.), The Indianized States of Southeast Asia, University of Hawaii Press, ISBN 978-0-824-80368-1
  • Lafont, Pierre-Bernard (2007), Le Campā: Géographie, population, histoire, Indes savantes, ISBN 978-2-84654-162-6
पूर्वाधिकारी
हरिवर्मन प्रथम 802817
चम्पा के राजा
817?
उत्तराधिकारी
इन्द्रवर्मन द्वितीय ?893