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 मराठा   यह आलेख विशिष्ट "मराठा जाति" के बारे में है. मराठी वक्ताओं के व्यापक समूह के लिए, मराठी लोगों को देखें.


बंबई (मुंबई), 1880 से एक मराठा परिवार है मराठा (मराठी: मराठा, भी Marhatta) एक भारतीय जाति हैं, मुख्य रूप से महाराष्ट्र राज्य में. अवधि मराठा तीन संबंधित usages: मराठी भाषी क्षेत्र के भीतर यह प्रमुख मराठा जाति का वर्णन, बाहर यह महाराष्ट्र मराठी बोलने वाले लोगों की पूरी क्षेत्रीय आबादी के लिए उल्लेख कर सकते हैं, ऐतिहासिक, यह मराठा साम्राज्य का वर्णन सत्रहवाँ सदी में शिवाजी द्वारा स्थापित और उनके उत्तराधिकारियों, जो कई जातियों शामिल द्वारा जारी [1].

वे मुख्य रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक और गोवा के भारतीय राज्यों में रहते हैं. गोवा और पड़ोसी कारवार में वे विशेष रूप से क्षत्रिय मराठों या कोंकण मराठों के रूप में अपनी क्षेत्रीय और भाषाई संरेखण के लिए एक संबद्धता के रूप में जाना जाता है. [2] इंदौर मराठों Dhangar Ahirs के रूप में खुद को कहता है. [3]


शब्द - साधन Bold text "मराठा" और "मराठी" शब्द की व्युत्पत्ति अनिश्चित है. यह प्राकृत शब्द Maharashtri जैन साहित्य, संस्कृत महाराष्ट्र से ही "महान दायरे" ("महान" महा से और rāṣṭra "राष्ट्र, अधिराज्य, जिला") में पाया Marhatta के व्युत्पन्न किया जा सकता है. एक सिद्धांत रखती है कि अशोक के शिलालेख के कुछ Rāṣṭrika के रूप में जाना जाता कबीले के लिए एक संदर्भ जो मराठी भाषी लोगों के progenitors थे डेक्कन की एक लोगों के लिए alludes, और है कि बाद में "प्राकृत Mahārāṣhṭri" इन लोगों के साथ जुड़ा हुआ है Ratta अन्य सिद्धांतों के साथ शब्दों मराठा और Rāṣhṭri लिंक करते हैं, माना जाता है कि Rāshtrakuta, एक वंश कि 10 शताब्दियों के लिए 8 से डेक्कन से अधिक बोलबाला आयोजित नाम के एक भ्रष्टाचार है. सभी सिद्धांतों लेकिन वाणी है, भाषाविदों के रूप में करते हैं, कि आधुनिक मराठी भाषा Mahārāshtri के रूप में जाना जाता प्राकृत से विकसित किया गया है.चित्र:Superscript text

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PUSHTIMARG ME YUVA LO AGE LNA... Sunil dhakad (वार्ता) 12:38, 12 जुलाई 2017 (UTC)

एक बोध कथा

  • एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में, एक वृद्ध किसान अपने एकलौते पुत्र के साथ रहता था। उनके स्वामित्व में एक छोटा सा खेत का टुकड़ा, एक गाय, और एक घोड़ा था।*

एक दिन उसका घोड़ा कहीं भाग गया। उन लोगों ने घोड़े को ढूँढने की बहुत कोशिश की पर घोड़ा नहीं मिला। किसान का पुत्र बहुत दुखी हो गया। वृद्ध किसान के पड़ोसी भी मिलने आये।

  • गांववालों ने किसान को सांत्वना देने के लिए कहा, “ईश्वर आपके प्रति बहुत कठोर है, यह आपके साथ बहुत बुरा हुआ।”*

किसान ने शांत भाव से उत्तर दिया, “यह निश्चित रूप से ईश्वरीय कृपा है।”

  • दो दिनों बाद घोड़ा वापस आ गया, लेकिन अकेला नहीं। चार अच्छे शक्तिशाली जंगली घोड़े भी उसके पीछे-पीछे आये। इस तरह से उस वृद्ध किसान के पास पांच घोड़े हो गए।*

लोगों ने कहा, “बहुत खूब। तुम तो बहुत भाग्यशाली हो।”

  • बहुत ही सम भाव से कृतज्ञ होते हुए वृद्ध किसान ने कहा, “निश्चित रूप से यह भी ईश्वरीय कृपा है।”

उसका पुत्र बहुत उत्साहित हुआ। दूसरे ही दिन उसने एक जंगली घोड़े को जाँचने के लिए उसकी सवारी की, किन्तु घोड़े से वो गिर गया और उसका पैर टूट गया।*

पड़ोसियों ने अपनी बुद्धिमता दिखाते हुए कहा, “ये घोड़े अच्छे नहीं हैं। वो आपके लिए दुर्भाग्य लाये हैं, आखिरकार आपके पुत्र का पाँव टूट गया।”

  • किसान ने उत्तर दिया, “यह भी उनकी कृपा है।”

कुछ दिनों बाद, राजा के अधिकारीगण गाँव में आवश्यक सैन्य सेवा हेतु युवकों को भर्ती करने के लिए आये। वे गाँव के सारे नवयुवकों को ले गए लेकिन टूटे पैर के कारण किसान के पुत्र को छोड़ दिया।*

कुढ़न और स्नेह से गांववालों ने किसान को बधाई दी कि उसका पुत्र जाने से बच गया।

  • किसान ने कहा, “निश्चित रूप से यह भी उनकी ही कृपा है।”*

ये हमेशा ध्यान रखे के प्रभु कभी भी किसी का बुरा नही करते ना ही सोचते ॥ हुम जीव ऐसे है के हमेशा प्रभु को ही दोष देते है के हुम तो इतना भजन करते है सेवा करते है तब भी भगवान हमरे साथ एस करते है जब की ऐसी मिथ्या शौच जीव की होती है प्रभु पे विश्वास दृढ़ता और धेर्य रखने चहिये चाहिये । हमरे जीवन मे जो भी होत है वो हमारे कर्मों क हिसाब होता है चाहे अच्छा हो बुरा हो ये हमरी सोच है ॥ Sunil dhakad (वार्ता) 12:40, 12 जुलाई 2017 (UTC)

एक बोध कथा

  • एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में, एक वृद्ध किसान अपने एकलौते पुत्र के साथ रहता था। उनके स्वामित्व में एक छोटा सा खेत का टुकड़ा, एक गाय, और एक घोड़ा था।*

एक दिन उसका घोड़ा कहीं भाग गया। उन लोगों ने घोड़े को ढूँढने की बहुत कोशिश की पर घोड़ा नहीं मिला। किसान का पुत्र बहुत दुखी हो गया। वृद्ध किसान के पड़ोसी भी मिलने आये।

  • गांववालों ने किसान को सांत्वना देने के लिए कहा, “ईश्वर आपके प्रति बहुत कठोर है, यह आपके साथ बहुत बुरा हुआ।”*

किसान ने शांत भाव से उत्तर दिया, “यह निश्चित रूप से ईश्वरीय कृपा है।”

  • दो दिनों बाद घोड़ा वापस आ गया, लेकिन अकेला नहीं। चार अच्छे शक्तिशाली जंगली घोड़े भी उसके पीछे-पीछे आये। इस तरह से उस वृद्ध किसान के पास पांच घोड़े हो गए।*

लोगों ने कहा, “बहुत खूब। तुम तो बहुत भाग्यशाली हो।”

  • बहुत ही सम भाव से कृतज्ञ होते हुए वृद्ध किसान ने कहा, “निश्चित रूप से यह भी ईश्वरीय कृपा है।”

उसका पुत्र बहुत उत्साहित हुआ। दूसरे ही दिन उसने एक जंगली घोड़े को जाँचने के लिए उसकी सवारी की, किन्तु घोड़े से वो गिर गया और उसका पैर टूट गया।*

पड़ोसियों ने अपनी बुद्धिमता दिखाते हुए कहा, “ये घोड़े अच्छे नहीं हैं। वो आपके लिए दुर्भाग्य लाये हैं, आखिरकार आपके पुत्र का पाँव टूट गया।”

  • किसान ने उत्तर दिया, “यह भी उनकी कृपा है।”

कुछ दिनों बाद, राजा के अधिकारीगण गाँव में आवश्यक सैन्य सेवा हेतु युवकों को भर्ती करने के लिए आये। वे गाँव के सारे नवयुवकों को ले गए लेकिन टूटे पैर के कारण किसान के पुत्र को छोड़ दिया।*

कुढ़न और स्नेह से गांववालों ने किसान को बधाई दी कि उसका पुत्र जाने से बच गया।

  • किसान ने कहा, “निश्चित रूप से यह भी उनकी ही कृपा है।”*

ये हमेशा ध्यान रखे के प्रभु कभी भी किसी का बुरा नही करते ना ही सोचते ॥ हुम जीव ऐसे है के हमेशा प्रभु को ही दोष देते है के हुम तो इतना भजन करते है सेवा करते है तब भी भगवान हमरे साथ एस करते है जब की ऐसी मिथ्या शौच जीव की होती है प्रभु पे विश्वास दृढ़ता और धेर्य रखने चहिये चाहिये । हमरे जीवन मे जो भी होत है वो हमारे कर्मों क हिसाब होता है चाहे अच्छा हो बुरा हो ये हमरी सोच है ॥ Sunil dhakad (वार्ता) 12:40, 12 जुलाई 2017 (UTC)