विकिपीडिया वार्ता:एशियाई माह २०२५/प्रतिभागी
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[संपादित करें]Why have you added this page? Kingsacrificer (वार्ता) 18:15, 9 सितंबर 2025 (UTC)
Sindhu ghati sabhyata
[संपादित करें]बिन्हारी सभ्यता उत्तराखंड: एक भूली हुई पहचान, जिसे फिर से जगाने का समय आ गया है
[संपादित करें]बिन्हारी समुदाय उत्तराखंड के देहरादून जिले के दुर्गम पहाड़ी एरिया (बिन्हार क्षेत्र)में निवास करता है। यह समुदाय अपनी विशिष्ट संस्कृति,रीति-रिवाज,अपने विशिष्ट स्वाभिमान और स्थानीय देवताओं के लिए प्रसिद्ध है। बिन्हारी लोग मुख्य रूप से कृषि और पशु पालन में लगे हुए हैं। वे अपनी ज़मीन पर खेती करते हैं और अपने पशुओं को चराने के लिए जंगलों में ले जाते हैं। क्योंकि बिन्हारी समुदाय के लोगों का गौमाता ओर अन्य पशुओं के प्रति विशेष प्रेम ओर नाता रहा तो बिन्हारी समुदाय को भद्राज देवता (बलराम भगवान) ने अपना आर्शीवाद प्राचीन समय से ही दिया,जिनकी पूजा-अर्चना बहुत ही भक्ति और श्रद्धा से की जाती है। भद्राज देवता मंदिर बिन्हार की ऊंची पहाड़ियों में स्थित है, जो बिन्हारी समुदाय का एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है, बिन्हारी लोग प्राचीन समय से भद्राज देवता की पूजा अर्चना ओर उनके नियमों को मानते आए है ।
बिन्हारी लोग महासू देवता की भी पूजा अर्चना करते आ रहे है क्योंकि माना जाता है कि बिन्हारी सभ्यता उत्तराखंड की जौनसारी जनजाति सभ्यता का ही एक विस्तार ओर रूप है लेकिन संख्या मे कम होने के कारण समुदाय की आवाज राज्य ओर केंद्र सरकार तक नहीं पहुंच पाती ओर इसी कारण आज भी ये बहुत पिछड़ा क्षेत्र है जहां बेसिक सुख सुविधाओं की आज भी बहुत कमी है, इतिहासकार ओर स्थानीय बुजुर्ग बताते है कि बिन्हार समुदाय को जौनसार समुदाय की तरह ही ST का दर्जा मिलना था लेकिन मजबूत लीडरशीप की आभाव के कारण,भौगोलिक सीमांकन, ओर बहुत ऐसे कारण रहे कि बिन्हारी समुदाय को ST नहीं मिला। हालांकि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद स्थानीय लोगों ने आरक्षण की मांग रखी ओर राज्य सरकार ने बिन्हारी समुदाय को पिछड़ा मानकर उत्तराखंड राज्य ओबीसी लिस्ट में डाल दिया लेकिन उसका बिन्हारी समुदाय को कोई खास लाभ नहीं मिला क्योंकि ओबीसी में इतनी जातीय आती है कि उसमें बिन्हारी समुदाय जैसा छोटा समाज दब कर रहे गया।
बिन्हारी समुदाय की वेशभूषा भी बहुत ही विशिष्ट है। पुरुष लोग जंगेल (ऊनी पायजामा) और चोड़ा (ऊनी रोब) पहनते हैं, जबकि महिलाएं घाघरा और चोलोरी पहनती हैं। बिन्हारी महिलाएं अपने पारंपरिक ज्वेलरी जैसे कि टंगल, बुलाक और नाथ भी पहनती हैं। बिन्हारी समुदाय के लोग अपने पारंपरिक त्योहारों और मेलों में बहुत ही उत्साह और भक्ति से भाग लेते हैं। मोरोज और बिस्सू जैसे त्योहार समुदाय के महत्वपूर्ण त्योहार हैं, जो उनके कृषि और पशुपालन के जीवन से जुड़े हुए हैं।
बिन्हारी समुदाय की संस्कृति और परंपराएं बहुत ही समृद्ध और विविध हैं। वे अपने पूर्वजों की परंपराओं को बहुत ही श्रद्धा और सम्मान से मानते हैं और अपने जीवन को उनके अनुसार जीने का प्रयास करते हैं। Pritam tomar (वार्ता) 13:02, 4 दिसम्बर 2025 (UTC)